कश्मीर घोषणाओं को गिलानी ने ठुकराया

  • 26 सितंबर 2010

भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम की भारत प्रशासित कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में की गई घोषणाओं को पृथकतावादियों ने ठुकरा दिया है.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इन घोषणाओं को बेमानी बताया.

उनका कहना था कि उन्होंने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सामने अनेक बातें रखीं थीं लेकिन उनका इन घोषणाओं से बहुत कम संबंध है.

गिलानी ने कहा,'' कश्मीर में मारे गए लोगों के खून की कीमत पाँच लाख रुपए तय करना उन्हें स्वीकार नहीं है. इसकी कीमत सिर्फ़ आज़ादी है.''

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता यासीन मलिक का कहना था कि जेकेएलएफ़ की विशेषाधिकार समिति इस मामले के सभी पहलुओं पर चर्चा के बाद फ़ैसला लेगी.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इसी सोमवार से स्कूलों को खोल दिया जाएगा.

उमर अब्दुल्ला का कहना था कि इसी हफ़्ते संयुक्त कमान की बैठक होगी और सुरक्षाबलों की मौजूदगी की समीक्षा की जाएगी.

उन्होंने कहा कि कश्मीर में तनाव को कम करने के लिए कदम उठाए जाएंगे और हुर्रियत से अपील की कि वो सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग करे.

सरकार की पहल

शनिवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में कई घोषणाएं की थी जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ़्तार युवाओं की रिहाई के साथ-साथ सुरक्षा बलों की मौजूदगी की समीक्षा भी शामिल है.

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक के बाद गृहमंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत में जानकारी दी कि कश्मीर के विषय में कई फ़ैसले लिए गए.

इसमें अलग-अलग गुटों के साथ बातचीत के लिए एक मध्यस्थ दल की नियुक्ति, सैनिकों की मौजूदगी की समीक्षा,

मारे गए लोगों के परिवारों को पांच लाख रुपए का मुआवज़ा और अशांत क्षेत्र अधिनियम की समीक्षा की बात शामिल है.

गृहमंत्री चिदंबरम का कहना था कि इन सब कदमों से उन्हें उम्मीद है कि कश्मीर के प्रदर्शनकारियों समेत अलग-अलग गुटों की चिंताओं को दूर किया जा सकेगा.

चिदंबरम के नेतृत्व में हाल ही में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारतीय कश्मीर के दौरे से लौटा है और शनिवार को हुई ये घोषणाएं लोगों और नेताओं से बातचीत के बाद की गई हैं.

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