तेजस्वी का राहुल-प्रेम

तेजस्वी

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव कांग्रेस की विचार धारा से असहमत होते हुए भी कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी के विचार और कार्यकलाप से काफी हद तक सहमत हैं.

तेजस्वी यादव ने अपने परिवार से लेकर राजनीति में युवाओं तक से जुड़े कई सवालों के खुलकर जवाब दिए.

याद रहे कि लालू प्रसाद ने अपने इस पुत्र को हाल ही राजनीतिक मंच पर अचानक उत्तार कर चौंकाया है.

सुनिए तेजस्वी यादव से बातचीत

तेजस्वी, सबसे पहले आप अपनी उम्र, शिक्षा और शौक के बारे में बताएं.

22 साल का हूँ. इंटर तक पढाई की है. क्रिकेट में शौक बहुत ज़्यादा होने की वजह से पढाई अधिक नहीं कर पाया. रणजी ट्राफी वगैरह खेला है मैंने. आईपीएल में भी हूँ. तो ज़ाहिर है क्रिकेट पर ही ज़्यादा ध्यान है मेरा.

तो क्या शुरू से ही सोच लिया था कि क्रिकेट में करियर बनाना है?

हाँ, बचपन से ही क्रिकेट खेलना मुझे बेहद पसंद है. दिल्ली जाने के बाद नेशनल स्टेडियम में प्रैक्टिस करके जब क्रिकेट में ध्यान केन्द्रित किया तो रिजल्ट भी अच्छे मिले.

तो उसी में आगे बढ़ना है या रास्ता बदलना है?

रास्ता बदलना नहीं है. लम्बे समय तक खेलना है. राजनीति में अभी पापा (लालू प्रसाद) का सहयोग करने के लिए बिहार के चुनाव में मुझे उनके साथ कैम्पेन करना है. बाद में जब उम्र होगी तब पार्टी (राजद) चाहेगी तो चुनाव भी लड़ना चाहूँगा क्योंकि पॉलिटिक्स में भी मेरा ख़ासा इंटरेस्ट है.

लालू जी से क्या राजनीतिक मसलों पर भी आपकी बातचीत होती रही है?

बिलकुल होती है. अब माँ (राबड़ी देवी) और पापा दोनों से कभी- कभी बिहार और देश की राजनीति के बारे में चर्चा करता रहता हूँ.

लालू जी के राजनितिक जीवन का जो कठिन दौर था, जब उन्हें चारा घोटाला के सिलसिले में जेल भी जाना पड़ा था, तब आप अपनी उस छोटी उम्र में क्या महसूस कर रहे थे ?

उस समय माहौल काफी ख़राब था. परिवार में भारी तनाव और दुख था. तो ज़ाहिर है मेरे बचपन का वो बहुत ही बुरा अनुभव था. लेकिन शुक्र है कि मेरी माँ ने हालात को बखूबी संभाला.

आप तो कभी अभाव में नहीं रहे, मुख्यमंत्री माता-पिता के घर में सुख सुविधा के साथ आपका लालन - पालन हुआ. तो क्या इसी विरासत ने आपको राजनीति की तरफ खींचा है?

अगर आपकी फैमिली में मुख्यमंत्री या ऊंचे राजनीतिक ओहदे पर लोग हों तो स्वाभाविक है कि परिवार के बच्चों की भी दिलचस्पी उस तरफ बढ़ेगी..

आपके पिता ने तो ग़रीबी के दिन भी देखे हैं, गाँव- समाज में रहे हैं. आपका तो ऐसा कोई अनुभव नहीं है.

वही अनुभव लेने में अब अपने राज्य के गाँव- समाज के बीच जाऊँगा. माँ-पापा के साथ घूम कर लोगों से संपर्क बढ़ाऊंगा.

15 वर्षों तक आपके माँ और पापा यहाँ सत्ता में रहे. कभी आपने सोचा है कि इनके शासनकाल में बिहार में जो तरक्की होनी चाहिए थी वो नहीं हो पाई और इसके लिए कहीं न कहीं आपके माता-पिता भी ज़िम्मेदार हैं?

नहीं, बिहार में उस दौरान भी तरक्की काफी हुई. ग़रीबों को खुलकर बोलने का अधिकार उन्होंने दिलाया. 15 साल राज करना बिहार में कांटे का ताज पहनने जैसा था. फिर भी कई ऐसे अच्छे काम हुए जो पहले नहीं हुए थे.

मेरा सवाल था कि राज्य के विकास के मामले में उस शासनकाल के दौरान कमज़ोरी रही. और इसके लिए आपके माता- पिता ज़िम्मेदार कैसे नहीं हैं?

उनसे पहले तो कांग्रेस का शासनकाल था. ज़्यादा समय तक तो कांग्रेस ने ही राज् किया था. माँ और पापा जब मुख्यमंत्री बने तो उस समय पटना या बिहार कोई न्यूयॉर्क सिटी जैसा विकसित तो था नहीं, तो ज़्यादा ज़िम्मेदार मैं कोंग्रेस को ही मानूंगा.

कांग्रेस को और राहुल गांधी को आप कितना जानते -समझते हैं और उनकी दिशा या सोच आपको सही लगती है या नहीं?

ठीक है, युवाओं के तौर पर जहाँ तक राहुल जी को देखा जाए तो सबसे पहले वो बहुत ही अच्छे इंसान हैं. 'डाउन टू अर्थ ' हैं और युवाओं को पोलिटिक्स में लाने की जो बात वो करते हैं, ये उनकी काफी अच्छी सोच है. मगर उनकी पार्टी अलग है और हमारी पार्टी अलग है. दोनों में विचारधारा का फ़र्क़ है. राहुल जी अच्छे युवा नेता हैं. लेकिन उनको महंगाई के मुद्दे पर कारगर कार्रवाई के लिए अपनी पार्टी की सरकार पर जितना दबाव डालना चाहिए था, उतना नहीं डाला, ये ठीक नहीं है.

राजनितिक परिवार के युवा होने के नाते राहुल जी अगर आपको अपने साथ लेना चाहें या आप से सहयोग लेना चाहें तो क्या आप उन का साथ देंगे?

डिपेंड करता है कि किस चीज़ के बारे में बात करने वो मुझे बुलाते हैं. अगर सबके हित में और अच्छे काम के लिए सहयोग चाहेंगे तो हम ज़रूर देंगे, ख़ासकर ग़रीबों की बात होगी तो हम हमेशा आगे बढ़कर उनके साथ होंगे और मैं चाहूँगा कि यंगस्टर के लिए वो जो अच्छा काम कर रहे हैं, उसे जारी रखें. मैं अपने संपर्क के युवाओं से भी कहूँगा कि उनका सहयोग करें और चुनावों में या राजनीति में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें. युवाओं का वोटिंग परसेंटेज बहुत कम होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.

आपके माँ-पापा पर परिवारवाद का आरोप लगता है. इस आरोप के बारे में आपका नज़रिया क्या है ?

परिवारवाद के बारे में आप ये कह सकते हैं कि परिवार से जुड़े लोगों को अवसर जल्दी मिल जाते हैं. लेकिन उस अवसर को कैसे मेन्टेन किया जाए, ये अवसर पाने वाले पर निर्भर करता है. आपके काम से और जनता के समर्थन से ही आपको उस अवसर का फायदा मिल सकता है.

अगर आप लालू जी के बेटे नहीं होते तो क्या अभी लोगों का जितना ध्यान आपकी तरफ गया है उतना सामान्य स्थिति में जाता ?

ज़ाहिर तौर इतना ध्यान नहीं जाता. इसका फायदा तो मुझे मिला है और मैं ये कबूल भी करता हूँ.

सांसद रह चुके आपके दोनों मामा (साधु यादव और सुभाष यादव) अब आपके माँ - पापा के ख़िलाफ़ चले गए हैं और विरोध में बहुत कुछ बोल भी रहे हैं. इन बातों को आप किस तरह ले रहे हैं?

ये तो इमैच्योरिटी वाला काम किया है उन लोगों ने. हमने, मतलब मेरे माँ - पापा ने उनको परिवार से अलग नहीं किया. वो खुद अलग हुए. बल्कि उनको इस परिवार के कारण ही इतना सम्मान और राजनितिक अवसर मिला. अब वो जहाँ गये, या जो कर रहे हैं, तो उनको हम रोक भी नहीं सकते,ये उनका फैसला है.

क्या आपको लगता है कि उन्होंने आप सब के साथ दगा किया?

वो कहते हैं कि हमने दगा किया है, जबकि हमने कोई दगा नहीं किया. ये उनकी ग़लतफ़हमी है. इस चुनाव के बाद उन्हें पता चल जाएगा कि क्या सही है.

तो क्या आप चाहेंगे कि वे दोनों फिर से आपके साथ आ जायें ?

क्यों नहीं चाहेंगे.? हमारा दरवाजा खुला है. सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाए तो क्या हर्ज़ है.

क्या क्रिकेट में बहुत अच्छा नहीं कर पाने की वजह से आप राजनीति की तरफ आना चाह रहे है ?

ऐसा नहीं है. मैं अभी राजनीति में पूरी तरह आया कहाँ हूँ. इसमें तो समय है और अभी तो क्रिकेट में ही आगे बढ़ना चाहूँगा. क्योंकि क्रिकेट में मैंने हार कहाँ मानी है?.

लालू जी ने कह दिया है कि पहले तेजस्वी की शादी कर देंगे और तब वो राजनीति में ज़्यादा सक्रिय होगा. तो क्या शादी का इरादा है ?

नहीं - नहीं. ऐसी बात नहीं थी, पापा तो सिर्फ चुटकी ले रहे थे और उनके कहने का मतलब ये था कि अभी में सिर्फ राजद और लोजपा के लिए चुनाव में प्रचार करने आया हूँ.

Image caption तेजस्वी शादी के लिए जात पात को नहीं मानते लेकिन अरेंज मैरिज में उनका अधिक यकीन है.

शादी में जात- पात की बात आप ठीक समझते हैं ?

वैसे मैं माता - पिता की इच्छा के अनुसार और सहमति से विवाह को सही मानता हूँ. लेकिन अब ये सब कहीं - कहीं और कभी - कभी मायने नहीं भी रखता है. लव - मैरिज के मुक़ाबले अरेंज्ड - मैरिज ज़्यादा सफल हो रहा है.

आपका कहीं किसी से लव अफेयर तो नहीं चल रहा?

बिलकुल नहीं, अभी मेरा ऐसा कोई अफेयर नहीं चल रहा है.

क्या आप ये नहीं सोचते कि लालू जी से अलग आपकी कोई हैसियत बने, पहचान हो और सिर्फ आप अपने पिता के नाम से ही न जाने जाएँ?

उनके जैसी ऊंची हैसियत मेरी कभी बन भी नहीं सकती. वो न सिर्फ बड़े राजनेता हैं बल्कि सही मायने में ग़रीबों और पिछड़ों के भी नेता हैं. वो ऊपर से सख्त हैं लेकिन अन्दर से बड़े नरम दिल. मैं उनके जैसा बन सकूं, ये ज़रूर चाहूँगा.

राजनीति में जो युवा वर्ग है, उस पर ये आरोप लगता है कि ज़्यादातर युवा लुम्पेन यानी लम्पट चरित्र के दिखते हैं. ऐसे में आप खुद को बचाने और ऐसी खराब छवि को मिटाने के लिए क्या करेंगे?

दरअसल जो लम्पट चरित्र के युवा राजनीति में घुसते हैं, उनका एक ही मक्सद होता है कि किसी तरह जल्दी लाइमलाइट में आ जाएं. वो सोचते हैं कि राजनीति ही धन - बल बटोरने का शॉर्टकट है. मैं इस बात के सख्त ख़िलाफ़ हूँ.

जैसी नए ज़माने की संस्कृति की तरफ आजकल के युवाओं का रुझान है, उसमे आप खुद को कितना फिट पाते हैं?

ज़ाहिर सी बात है कि मैं यंगस्टर हूँ और आज के नॉर्मल युवा की तरह जींस और शर्ट पहनना, नए संगीत सुनना पसंद करता हूँ. मैं नए ज़माने से अलग नहीं हूँ.

जब आप युवाओं के बीच होते हैं या अपने मित्रों के बीच होते हैं तो ज़रूर सुनते होंगे कि बहुत से युवा राजनितिक नेताओं को काफी भला बुरा भी कहते रहते हैं. तब आपकी प्रतिक्रिया क्या होती है?

जो भला बुरा कहते हैं, मैं उनको सीधे बोलता हूँ कि आप क्यों नहीं ज्वाइन करते हो पौलिटिक्स? अगर आपको इतनी गन्दगी नज़र आ रही है राजनीति में तो उस गन्दगी को साफ़ करने की ज़िम्मेदारी से क्यों बचना चाहते हो ? बोलने से पहले हर युवा को ये बात सोचनी चाहिए.

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