अल्फ़ा के कार्यकर्ता पकड़े गए

अल्फ़ा विद्रोहियों की गिरफ़्तारी (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद से बहुत से विद्रोही नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है

बांग्लादेश ने असम के 16 अलगाववादी विद्रोही नेताओं और उनके परिवारजनों को भारतीय अधिकारियों के हवाले किया है.

अधिकारियों का कहना है कि ये विद्रोही यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) के सदस्य हैं.

बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने पिछले हफ़्ते भारत की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी इलाक़ों में तलाशी अभियान के दौरान इन्हें गिरफ़्तार किया था.

जिन नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है, उनमें 'कैप्टन' अंजान बोरठाकुर और 'लेफ़्टिनेंट' अनु बोरगोहेन हैं. अंजान बोरठाकुर बांग्लादेश में अल्फ़ा की गतिविधियों के प्रभारी रहे हैं जबकि अनु बोरगोहेन अल्फ़ा के प्रचार प्रभारी रहे हैं.

समझौते का आरोप

अल्फ़ा के मुख्य कमांडर परेश बरुआ ने मीडिया को भेजे गए अपने ईमेल में कहा है, "हमारे कुछ कार्यकर्ताओं ने पड़ोसी देश में समझौता कर लिया है और अब वे दुश्मन के हाथों में हैं."

उनका कहना है कि इन कार्यकर्ताओं ने ख़ुद को अपने परिवार सहित बांग्लादेश के सुरक्षा बलों के हवाले कर दिया.

अपने बयान में परेश बरुआ ने कहा है, "वे मुझसे कह रहे थे कि पड़ोसी देश में रहकर काम करना कठिन है क्योंकि वर्तमान सरकार बहुत कड़ाई बरत रही है, लेकिन मैं उनसे इस तरह से हथियार डालने की बेशर्मी की उम्मीद नहीं कर रहा था."

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि विद्रोही और उनके परिवारजनों को मिलाकर कुल 27 लोगों को बांग्लादेश के अधिकारियों ने मेघालय राज्य के डावकी पोस्ट पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) के हवाले किया है.

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा है, "इससे यह साबित होता है कि अल्फ़ा टूट रहा है और कार्यकर्ता लगातार परेश बरुआ के ख़िलाफ़ होते जा रहे हैं. अल्फ़ा के नरमपंथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब हम उनसे शांति वार्ता शुरु कर सकते हैं."

उन्होंने कहा है कि जिन 27 लोगों को अभी भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया है वे अब तक असम राज्य के हवाले नहीं किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि इन लोगों के ख़िलाफ़ कोई आरोप न लगाए जाएँ और उन्हें गिरफ़्तार न किया जाए, जैसा कि पूर्व में बांग्लादेश में पकड़े गए विद्रोही नेताओं के साथ किया गया है जिससे कि शांतिवार्ता में कोई बाधा न पड़े.

बांग्लादेश में वर्ष 2009 में शेख़ हसीना की सरकार आने के बाद से पश्चिमोत्तर राज्यों के उन विद्रोही संगठनों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की है, जो बांग्लादेश से अपनी कार्रवाई को अंजाम देते रहे हैं.

तब से अब तक विभिन्न संगठनों के 50 से अधिक विद्रोही कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर भारतीय अधिकारियों के हवाले किया जा चुका है.

बहुत से कार्यकर्ता ख़ुद बांग्लादेश छोड़कर भारत आए और सुरक्षा बलों के हाथों गिरफ़्तार हो गए.

संबंधित समाचार