मुसलमानों में थोड़ी नाराज़गी

मुसलमान
Image caption मुसलमानों ने कहा है कि वे इस फ़ैसले के बाद कोई बवाल नहीं चाहते

दिल्ली के जामा मस्जिद इलाक़े में मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को नाराज़गी के साथ स्वीकार किया है.

चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों के मौजूदगी के बीच लोगों ने हाईकोर्ट के फ़ैसले को टेलीविज़न पर देखा.

पूरे इलाक़े में आम दिनों की तुलना में आमदोरफ़्त बहुत कम है.

जामा मस्जिद के पास मटिया महल की गली में एक दुकान में टेलीविज़न पर यह फ़ैसला देख रहे नवेद ने कहा, "कोर्ट का फ़ैसला वैसा ही आया है जैसी कि उम्मीद थी और सबको मालूम था कि ऐसा फ़ैसला आएगा."

उनका कहना था कि वे इस फ़ैसले को मंज़ूर करते हैं.

जबकि एक अन्य युवक फ़ख़रुद्दीन का कहना था, "ये फ़ैसला ग़लत है, क्योंकि जिस स्थान पर मुसलमानों का कब्ज़ा था वह किसी और को किस तरह से दिया जा सकता है. इस फ़सले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए."

वहीं पास से गुज़र रहे एक व्यक्ति ने ग़ुस्से के साथ कहा,"अदालत उनकी, पार्लियामेंट उनकी, फ़ौज उनकी, तो ज़ाहिर है कि फ़ैसला उनके पक्ष में ही आना था."

उनका कहना था कि किसी भी ऊँची अदालत में जाने का कोई अर्थ नहीं रहता क्योंकि मुसलमानों को वहाँ भी न्याय नहीं मिलेगा.

जबकि एक अन्य व्यक्ति इमरान का कहना था, "फ़ैसला चाहे किसी के हक़ में आया हो, हम चाहते हैं कि हर ओर शांति बनी रहे और किसी तरह का कोई हंगामा न बरपा हो."

इसी बीच वहाँ बहस चल पड़ी कि वहाँ तो बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद से ही मूर्ति रख दी गई थी और उसे मंदिर बना दिया गया था.

इस पर कुछ लोगों का कहना था कि क्या हमारे घर में कल कोई मूर्ति रख दी जाए तो उसे मंदिर मान लिया जाना चाहिए?

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