कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की अपील

हैदराबाद में हिंदू मुस्लिम रैली

इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच के अयोध्या में विवादित स्थल के मालिकाना हक़ पर आए फ़ैसले के बाद सभी पक्षों ने अवाम से शांति बनाए रखने की अपील की है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ पीठ ने गुरुवार को अयोध्या के विवादित स्थल को राम जन्मभूमि घोषित किया है. तीन जजों की बेंच के बहुमत से आए फ़ैसले में विवादित ज़मीन को हिंदू, मुसलमान और निर्मोही अखाड़े के बीच, तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया है.

अदालती निर्णय आने के बाद अब तक भारत के किसी भी हिस्से से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है.

इसी बीच केंद्र सरकार ने सामूहिक एसएमएस और एमएमएस पर लगी रोक को शुक्रवार एक अक्तूबर तक बढ़ा दिया है.

देश भर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम अब भी जारी है. संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि 30 सितंबर तक लगे सामूहिक एसएमएस और एमएमएस प्रतिबंध को एक अक्तूबर तक जारी रखा जाएगा.

शांति की अपील

Image caption अहमदाबाद में बच्चे 'विविधता में एक एकता' का सदेंश देते हुए

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड से लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तक सभी ने निर्णय पर कोई ख़ुशी या ग़म का इज़हार न करने को कहा था.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देशवासियों से भारतीय संस्कृति और परंपरा के मुताबिक़ शांति बनाए रखने की अपील की है.

मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा, "भारत के लोगों में मेरी पूरी आस्था है. इस महान देश की संस्कृति, धर्म निरपेक्षता और भाईचारे में मेरी पूरी आस्था है. मैं जानता हूँ कि कुछ उपद्रवी लोग ही समाज में दरार पैदा करते हैं. मैं देशवासियों से अपील करता हूँ कि इस तरह के शरारती और अफ़वाह फैलाने वाले लोगों पर विशेष नज़र रखें, जो शांति और सौहार्द बिगाड़ सकते हैं."

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों से शांति बनाए रखने की गुज़ारिश की है.

निर्णय आने के बाद मोहन भागवत ने कहा कि लोगों को ऐसा कुछ भी नहीं कहना या करना चाहिए जो किसी दूसरे की भावनाओं को आहत करे.

भागवत ने कहा, “ये हार या जीत नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रीय पहचान का विषय है. मैं मुसलमानों समेत सभी से एक बार फिर बीत वक़्त को भूलने की अपील करता हूं. हमें राष्ट्रीय एकता के हित में एक साथ काम करने का अवसर मिला है.”

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाबा जिलानी ने अदालत के फ़ैसले पर ‘आंशिक निराशा’ तो जताई लेकिन उन्होंने मुसलमान समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की.

फ़ैसले के बाद इस विवाद के पहले याचिकाकर्ता, 90 साल के हाशिम अंसारी ने कहा, “मैं मुलसमान समुदाय से किसी गुस्से या रंज का इज़हार न करने की निवेदन करता हूं. अगर उन्हें ऐसा कुछ करना भी है तो वे अपने घर के बंद दरवाज़ों के पीछे करें. आगे का रास्ता और भी मुश्किल होने वाला है.”

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