पुलिस की बर्बरता का शिकार पत्रकार

पुलिस
Image caption घाटी मे सुरक्षा व्यवस्था चौकस रखने को तत्पर पुलिस की मनमानी का शिकार हो जाता है आम आदमी

भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की मिसाल क़ायम करते हुए एक लोकप्रिय पत्रकार को इतनी बेरहमी से पीटा कि उन्हें श्रीनगर अस्पताल में भरती करवाना पडा .

एपीटीएन के कैमरामैन मेहराजुद्दीन की गर्दन पर पुलिस में लाठी का ऐसा वार किया कि वे बेहोश हो गए.

पुलिस ने उनके बेटे और एक सहयोगी उमर मेराज को भी नहीं बख़्शा.

पिछले कुछ समय से स्थानीय पत्रकारों पर लगातार इस तरह के हमले हो रहे हैं

जून से शुरू हुए भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले के बाद से अधिकारियों ने इलाके में कर्फ़्यू लगा दिया है.

इन हिंसक प्रदर्शनों में कई लोग मारे गए थे.

मेहराजुद्दीन एपने सहयोगी के साथ श्रीनगर विधानसभा की और जा रहे थे जब उन्हें पुलिस ने रोक लिया.

कर्फ़्यू में जाने के लिए अनुमति पत्र यानि पास होने के बावजूद उन्हें जाने से रोका गया.

जह मेहराजुद्दीन ने पुलिसकर्मी से कहा कि वे उनके अफ़सर से बात करना चाहते हैं, तो पुलिस कर्मी ने आपे से बाहर हो कर उन्हें पीटना शुरू कर दिया.

ये हमला शुक्रवार की सुबह उसी समय हुआ जब राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला विधानसभा में पुलिस द्वारा अख़बार ज़ब्त किए जाने की घटना पर माफ़ी मांग रहे थे.

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने विधानसभा को बताया कि पुलिस द्वारा अख़्बार ज़ब्त किए जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.

राज्य में मीडिया पर इन दिनों काफ़ी दबाव देखा जा रहा है.

एक वरिष्ठ पत्रकार शेख़ मुश्ताक़ का कहना था, “अब से पहले इतना असुरक्षित हमने कभी महसूस नहीं किया. हमें न केवव अपनी जान पर ख़तरा उठाना पड़ रहा है बल्कि समय समय पर हमें बेइज़्ज़त भी किया जाता है.”

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