चुनावी टिकटों को लेकर घमासान

बिहार विधानसभा
Image caption सबसे अधिक नाराज़गी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में है.

बिहार के लगभग सभी प्रमुख दलों के दफ़्तरों में पिछले कुछ दिनों से उन तमाम लोगों ने हंगामा मचा रखा है, जिन्हें पार्टी ने चुनावी टिकट नहीं दिए, यानी उम्मीदवार नहीं बनाया.

राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल युनाइटेड भी इस हंगामे की लपेट में है. लेकिन इस मामले में सबसे ज़्यादा आफ़त में कांग्रेस है.

रविवार को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पटना में पार्टी दफ़्तर - सदाक़त आश्रम पर ही कब्ज़ा जमा लिया और वहाँ के सारे कमरों में ताले जड़ दिये.

हालत ये हो गयी है कि भय के मारे पार्टी का कोई सांगठनिक पदाधिकारी वहाँ जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है.

ख़ासकर जिन दो नेताओं के ख़िलाफ़ पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है, वे हैं - कांग्रेस विधायक दल के नेता अशोक राम और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी महबूब अली क़ैसर.

इन दोनों पर चुनावी टिकट बेचने या बड़ी रकम ले-दे कर ग़ैर-कांग्रेसी और बाहरी लोगों को उम्मीदवार बनाने का आरोप इनके दल के ही लोग खुलेआम लगा रहे हैं.

इन्ही दोनों नेताओं के साथ गत शनिवार को पटना हवाई अड्डे पर धक्का-मुक्की की गयी थी.

राज्य के कई हिस्सों में कांग्रेस के दफ्तरों में नाराज़ कांग्रेसियों ने आगजनी और तोड़-फोड़ भी की है. पूर्णिया में तो इस पार्टी के दफ़्तर में रविवार को आग लगा दी गयी.

इसी तरह मधुबनी, सुपौल सहरसा और गोपालगंज में भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन के साथ भारी तोड़-फोड़ मचाई है.

इस बाबत कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्र कहते हैं कि उम्मीदवारों के चयन में गड़बड़ी की शिकायतें लेकर नाराज़ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का रोष बेकाबू होता जा रहा है.

उन्होंने बताया कि कहीं- कहीं उम्मीदवार बदलने के बारे में भी पार्टी आलाकमान के स्तर पर विचार हो रहा है.

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