'ईवीएम' पर उठे सवाल

इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन
Image caption 2004 में पहली बार भारत में इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया.

बिहार विधान सभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने एक सर्वदलीय बैठक के ज़रिए राजनीति में अपराधीकरण, चुनाव में अत्यधिक पैसे के इस्तेमाल, प्रायोजित समाचारों और ईवीएम के सही इस्तेमाल जैसे मसलों पर बातचीत की.

ये बैठक दो चरणों में हुई. पहले चरण में राष्ट्रीय दलों के नेताओं से बातचीत की गई और दोपहर बाद राज्य स्तरीय दलों के नेताओं ने इन मुद्दों पर अपना पक्ष रखा.

बातचीत के दौरान ‘इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन’ यानी ईवीएम के सही इस्तेमाल का मुद्दा छाया रहा.

ईवीएम का इस्तेमाल

ईवीएम के इस्तेमाल पर जहां कांग्रेस और सीपीआई साथ दिखाई दिए, वहीं भाजपा ने ईवीएम के इस्तेमाल पर अपनी शंकाएं व्यक्त कीं.

भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन के ज़रिए मत डालने के बाद मतदाताओं को एक ‘पेपर ट्रेल’ यानि रसीद मिलनी चाहिए जिससे लोगों को उनके चुनाव की पुष्टि हो सके.

उनका कहना था, ''पेपर ट्रेल सिस्टम की तकनीक चुनाव आयोग को लागू करनी चाहिए. इस योजना को पायलेट प्रोजेक्ट के रुप में शुरुआती तौर पर किसी छोटे निर्वाचन क्षेत्र से लागू करना चाहिए.''

कांग्रेस का कहना है कि वो इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन की कार्य पद्धति से संतुष्ट है.

कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा, ''जहां तक पेपर ट्रेल का सवाल है, उस पर चर्चा हो सकती है लेकिन ये प्रणाली तब तक लागू नहीं हो सकती जब तक कोर्ट इस के हक़ में फैसला न ले.''

राजनीति में अपराधीकरण

राजनीति में अपराधीकरण के मुद्दे पर बात करते हुए सभी दलों ने सावधानी बरती.

Image caption सभी दलों ने चुनाव के दौरान धन के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही.

सभी दलों का कहना है कि उम्मीदवारों के खिलाफ अपराध सिद्ध हो जाने पर ही उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठाए जाने चाहिए.

ग़ौरतलब है कि बिहार में पिछले विधानसभा चुनावों में कई उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किये गए थे.

बिहार में इस साल 21 अक्टूबर से 20 नवंबर तक होने वाले चुनाव में 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए सदस्यों का चुनाव होगा. मतगणना 24 नवंबर को होगी.

‘पेड न्यूज़’

चुनाव में अत्यधिक पैसे के इस्तेमाल पर जयंती नटराजन ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने इस बात पर सहमति जताई है कि चुनाव के दौरान धन के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ को काम में लाना चाहिए.

‘पेड न्यूज़’ यानि प्रायोजित समाचार छापने के मुद्दे पर भी सब दल एकमत नज़र आए.

पार्टियों का कहना है कि ‘पेड न्यूज़’ लोकतंत्र के खिलाफ है और इससे निष्पक्ष चुनावों की प्रक्रिया पर विपरीत असर पड़ता है.

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