कर्नाटक में राज्यपाल और स्पीकर में तनातनी

येदुरप्पा
Image caption कर्नाटक में विधायकों के इस्तीफे के बाद येदुरप्पा सरकार अल्पमत में आ गई है

कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने विधानसभा में सोमवार को होने वाले विश्वास मत से पहले भाजपा के बागी विधायकों को अयोग्य करार देने के मामले पर विधान सभा के स्पीकर को निर्देश दिया है कि वे यथास्थिति को बहाल रखें.

अपने पत्र में राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर इस निर्देश को नजरअंदाज किया जाता है तो ऐसी स्थिति में उनका फ़ैसला अंतिम होगा.

पत्र में स्पीकर से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सोमवार को होने वाले विश्वास मत के दौरान सभी विधायक सदन में मौजूद रहें.

इसके जवाब में स्पीकर केजी बोपय्या ने कहा कि पत्र की भाषा और लहजे को लेकर वे अचंभित हैं.

राज्यपाल का ये क़दम कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के लिए इसे एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

अल्पमत में

गौरतलब है कि 10 भाजपा विधायकों के बाग़ी होने और छह निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के चलते कर्नाटक की भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है.

गुरुवार को पांच निर्दलीय और भाजपा के छह विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस लेने के अपने फ़ैसले के बारे में कर्नाटक के राज्यपाल को सूचित किया था.

उधर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी राज्यपाल के निर्देश पर आपत्ति जताई है. पार्टी के नेता वैंकय्या नायडू ने कहा है, "कर्नाटक के राज्यपाल का पत्र अपमानजनक और असंवैधानिक है. हम राज्यपाल के पत्र से स्तब्ध हैं."

भाजपा नेता और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर परिकर ने बीबीसी को बताया है कि राज्यपाल एक 'मर्सनेरी' या 'भाड़े के सिपाही' की तरह व्यवहार कर रहे हैं.

कर्नाटक विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 224 है. इसमें भाजपा के पास 117 सीटें, कांग्रेस के पास 77, जेडीएस के पास 28 और निर्दलियों के पास छह सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए भाजपा को 113 सीटें चाहिए.

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