भाजपा के बाग़ी विधायक बर्ख़ास्त

  • 11 अक्तूबर 2010
येदुरप्पा
Image caption कर्नाटक में विधायकों की बगावत के बाद येदुरप्पा सरकार अल्पमत में आ गई है

कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केजी बोपैय्या ने भाजपा के 16 बाग़ी विधायकों को बर्ख़ास्त कर दिया है.

इनमें वो पांच निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं जो पिछले दो साल से भाजपा की सरकार में शामिल थे और पांच साल तक सरकार को समर्थन देने का लिखितनामा दे चुके थे.

येदुरप्पा सरकार को आज सदन में अपना बहुमत साबित करना है.

इस कवायद के बीच बाग़ी विधायकों ने जबरन विधानसभा में घुसने की कोशिश की. बर्ख़ास्त किए गए विधायकों का कहना है कि वो स्पीकर के फ़ैसले के ख़िलाफ़ राज्यपाल से भी बात करेंगे.

बंगलौर के स्थानीय पत्रकार भास्कर हेगड़े का कहना है कि बाग़ियों की विधायकों को बर्ख़ास्त करने के इस फ़ैसले को लेकर स्पीकर और राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के बीच मतभेद ऊभर कर सामने आ गए हैं.

उन्होंने कहा, ''राज्यपाल के पास अब भी एक ब्रह्मास्त्र है. येदुरप्पा सरकार के विश्वासमत हासिल करने के बाद भी राज्पाल सरकार को बर्ख़ास्त कर कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की पैरवी कर सकते हैं.''

हेगड़े ने कांग्रेस के कुछ विधायकों के विश्वासमत में शामिल न होने की भी संभावना जताई. ऐसा होने पर भाजपा के लिए बहुमत साबित करना आसान हो जाएगा

स्पीकर के इस फ़ैसले के बाद सदन में सीटों की कुल संख्या 208 हो गई है.

अल्पमत

ग़ौरतलब है कि स्पीकर ने भाजपा के 13 विधायकों को नोटिस जारी किया था जिनमें से दो के पार्टी में वापस लौटने के बाद बाग़ी विधायकों की संख्या 11 रह गई थी.

वर्तमान परिस्थिती में कर्नाटक की भाजपा सरकार अल्पमत में है.

गुरुवार को पांच निर्दलीय और भाजपा के छह विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस लेने के अपने फ़ैसले के बारे में कर्नाटक के राज्यपाल को सूचित कर दिया था.

इधर राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के रवैये से भाजपा की उम्मीदों को झटका लगा.

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष केजी बोपैय्या को पत्र लिखकर कहा था कि विश्वास मत से पहले वे किसी भी विधायक को अयोग्य घोषित न करें.

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यपाल के निर्देश पर कड़ी आपत्ति जताई.

लोक सभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने राज्यपाल के क़दम को अंसवैधानिक क़रार देते हुए राष्ट्रपति से उन्हें वापस बुलाने की माँग की है.

ग़ौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा में 224 सीटें हैं और इसमें भाजपा के 117, कांग्रेस के 73, जद-एस के 28 और छह निर्दलीय विधायक हैं.

सरकार बनाने के लिए भाजपा को 113 विधायकों का समर्थन चाहिए.

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