दून स्कूल में अब ग़रीब भी पढ़ सकेंगे

दून स्कूल.
Image caption अब ग़रीब बच्चे भी दून जैसे स्कूल में पढ़ाई कर सकेंगे.

मशहूर दून स्कूल का नाम लेते ही एक तरह से द्रोणाचार्य के गुरूकुल की याद आती है जहां सिर्फ अमीर लोगों के बच्चे ही पढ़ सकते हैं.

लेकिन अपनी स्थापना के 75 साल पूरे होने के मौक़े पर दून स्कूल शायद इस छवि को तोड़ने की कोशिश कर रहा है.

स्कूल के हेडमास्टर पीटर मैकलॉलिन ने पब्लिक स्कूलों में एक चौथाई सीटें निर्धन वर्ग के लिये आरक्षित करने के सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है.

इस महीने दून स्कूल के 75 साल पूरे हो रहे हैं और इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्कॉलरशिप भी शुरू की जा रही है.

गांधी परिवार

दून स्कूल की ख्याति दो लोगों से ख़ास तौर पर जुड़ी है एक तो ये कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने यहां पढ़ाई की और दूसरे ये कि उनके ही भाई संजय गांधी को अनुशासनहीनता के लिये नोटिस दिया गया और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से कहा गया कि वो अपने नाती संजय गांधी को यहां से ले जाएं.

इसके अलावा जाने माने लेखक विक्रम सेठ और ‘लिटिल टेरेरिस्ट’ फ़ेम अश्विनी कुमार जैसे यहां के सैकड़ों पूर्व छात्रों ने देश-दुनिया में अपना नाम रोशन किया है.

अस्सी एकड़ में फैला दून स्कूल का प्रांगण देहरादून के बेहद शांत और सुरक्षित कैंट इलाक़े में है और एक उपनगर की तरह ही है.

वर्ष 1935 में जब स्कूल की स्थापना की गई थी तो उद्देश्य ब्रिटिश राज के तहत लोकतांत्रिक संस्थाओं को बढ़ावा देना था. लेकिन अब बदले हुए ग्लोबल परिप्रेक्ष्य में दून स्कूल अपने मिशन को फिर से परिभाषित करने की कोशिश में है.

दून स्कूल के हेडमास्टर पीटर मैक्लॉलिन ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, “अब भारत ख़ुद एक ताक़त है और पूरी दुनिया भारत से जुड़ना चाहती है. हम चाहते हैं कि इस लिहाज़ से दून स्कूल का दायरा भी बढ़े और उसके सरोकार भी .”

आरक्षण

हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने पब्लिक स्कूलों में एक चौथाई सीटें ग़रीब छात्रों के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव दिया है. दून स्कूल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

Image caption दून स्कूल के हेडमास्टर पीटर मैक्लॉलिन स्कूल को एक नई पहचान देने की कोशिश मे लगें हैं.

ग़ौरतलब है कि कई पब्लिक स्कूलों ने इस पर अपनी आशंकाएं ज़ाहिर की है.

दून स्कूल के हेडमास्टर पीटर मैक्लॉलिन का कहना था कि, “कपिल सिब्बल का ये प्रस्ताव थोड़ा जटिल ज़रूर है लेकिन हम इसे लागू करने से पीछे नहीं हटेंगे. अगर हम समाज के वंचित लोगों की ही सेवा नहीं कर सकते तो इस तरह की शिक्षण संस्थाओं का औचित्य ही क्या है.”

इस सवाल के जवाब में कि यहां सिर्फ़ अमीर लोगों के बच्चे ही पढ़ते हैं उनका कहना था, “हम चाहते हैं कि हमारे स्कूल में हर वर्ग के लोग पढें. यहां मशहूर और धनी लोगों के बच्चे ज़रूर पढ़ते हैं लेकिन कई बच्चे ऐसे भी हैं जो यहां से पढ़ने के बाद धनी और मशहूर बने हैं.”

प्लैटिनम जुबली समारोह के अवसर पर दून स्कूल में बडी संख्या में स्कॉलरशिप भी शुरू की जा रही है ताकि उन छात्रों को यहां पढ़ाई करने का मौक़ा मिल सके जो अधिक फ़ीस देने की स्थिति में नहीं रहते.

21 से 24 तारीख़ के बीच दून स्कूल के प्लैटिनम जुबली समारोह में भूटान नरेश जिग्मे वॉंग्चुक और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल विशिष्ट अतिथि होंगे और साथ ही राहुल गांधी जैसे हज़ारों पुराने छात्र भी अपने स्कूली जीवन की याद ताज़ा करने एक बार फिर यहां आएंगे.