लैंगिक समानता में भारत बहुत पीछे

Image caption आर्थिक भागीदारी में अब भी पीछे

विश्व आर्थिक मंच की सालाना रिपोर्ट के अनुसार लैंगिक समानता के मामले में नॉर्डिक देश शीर्ष पर और भारत 112वें नंबर पर.

मंच ने दुनिया के 134 देशों के सर्वेक्षण के आधार पर लैंगिक समानता रिपोर्ट प्रकाशित किया है.

इस सालाना रिपोर्ट में मुख्य तौर पर इस बात पर विचार किया जाता है कि राजनीति, शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की क्या हैसियत है. हालाँकि देशों की रैंकिंग तय करने में 10 अन्य मानकों पर भी विचार किया जाता है.

पिछले साल की रिपोर्ट की तरह इस बार भी लैंगिक समानता की दृष्टि से नॉर्डिक देशों या पश्चिमोत्तर यूरोप के देशों को शीर्ष स्थान मिले हैं. कुल 134 देशों की इस सूची में विगत वर्ष की तरह आइसलैंड पहले नंबर पर है, जबकि नॉर्वे और फ़िनलैंड को क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान दिया गया है.

भारत बहुत नीचे

जहाँ तक भारत की बात है, तो विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में उससे नीचे सिर्फ़ ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सीरिया और क़तर जैसे 22 देश हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो कम-से-कम 111 देश ऐसे हैं जो महिला-पुरुष बराबरी के संदर्भ में भारत से आगे हैं.

उल्लेखनीय बात ये है कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान भारत विश्व रैंकिंग में 98वें स्थान से गिर कर 112वें पर पहुँच गया है. वैसे जब भारत 98वें स्थान पर था तो लैंगिक समानता सर्वे में आज की तरह 134 की जगह सिर्फ़ 114 देशों को शामिल किया गया था.

वैसे इस अवधि में भारत दो बार 114वें नंबर तक नीचे गया.

विश्व आर्थिक मंच के कार्यकारी प्रमुख क्लाउस श्वाब ने रिपोर्ट जारी किए जाने के मौक़े पर कहा है कि स्त्री-पुरुष समानता किसी भी देश की संपन्नता का आधार है.

रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जहाँ महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर घटा है, वहीं आर्थिक भागीदारी के मामले में अधिकतर देशों में महिलाएँ अभी पुरुषों से कोसों पीछे हैं.

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