वार्ताकार समिति एक 'मज़ाक':उमर फारूक़

मीरवाईज़
Image caption मीरवाईज़ ने इस समिति से किसी बात चीत से इंकार किया है

भारत प्रशासित कश्मीर के पृथकतावादी गुटों ने केन्द्र सरकार के राज्य के लोगों से बातचीत करने के लिए तीन सदस्यीय वार्ताकार समिति की घोषणा को एक 'मज़ाक' करार दिया है.

हुर्रियत कांफ्रेस के नरम गुट के अध्यक्ष मीरवायज़ उमर फारूक़ ने बीबीसी से कहा, “हमें उम्मीद थी कि इस समिति में विरोधी और हुकुमत में मौजूद राजनीतिज्ञ होंगें जो कश्मीरी नेताओं के साथ-साथ पाकिस्तान से बातचीत कर पाएगें. लेकिन पत्रकारों और शिक्षाविदों पर आधारित कमेटी बनाकर भारत सरकार ने इस मामले की गंभीरता को नज़रअंदा़ज़ किया है. यह कश्मीर की जनता के साथ किया गया एक और मज़ाक़ है.”

उन्होंने हुर्रियत कांफ्रेस के इस बात चीत में शामिल होने की किसी संभावना से इंकार किया.

मीरवायज़ उमर फारूक़ का कहना था कि भारत को पहले सेना को विशेष अधिकार देने वाले कानून को वापस लेने, राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और सेना की वापसी जैसे फैसले करने चाहिए और उसके बाद गंभीरता से बातचीत की पहल करनी चाहिए.

वार्ताकार समिति

बुधवार को भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर के विभिन्न गुटों से बात चीत करने के लिए एक तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की है.

जाने माने पत्रकार दिलीप पडगाँवकर, सूचना आयुक्त एमएम अंसारी और शिक्षाविद राधा कुमार की इस समिति को गठित करने का फैसला सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक मे लिया गया.

यह घोषणा भारत सरकार के उस आठ सूत्री पैकेज का हिस्सा है जो उसने पिछले माह की थी.

इसके अलावा जम्मू और लद्दाख के लिए दो अन्य कार्यदलों की घोषणा भी की गई है.

अली शाह गिलानी

Image caption गिलानी चाहते हैं कि भारत पहले उनकी शर्तें माने.

हुर्रियत कांफ्रेस के दूसरे धड़े के नेता अली शाह गिलानी का कहना था कि वह भारत सरकार द्वारा शूरू की गई किसी बातचीत में तभी शामिल होंगें जब वह उनकी शर्तों को मान लेगी.

अली शाह गिलानी चाहते हैं कि भारत सरकार पहले कश्मीर की स्थिति को विवादित माने.

वह सेना को विशेष अधिकार देने वाले कानून को वापस लेने, राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और सेना की वापसी की माँग भी करते रहे हैं.

भारत के हिमायती माने जाने वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम वाई तारीगामी का कहना है कि हालांकि तीनों वार्ताकारों की नियत पर किसी तरह का शक नहीं किया जा सकता इस पूरे विवाद के राजनीतिक स्वरूप के चलते हम हमेशा से संसदीय समितियों की माँग करते रहे हैं.

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