पत्रकार पर भड़के बुख़ारी

वहीद चिश्ती
Image caption वहीद चिश्ती ने मौलाना बुख़ारी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है

दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम मौलाना सैयद अहमद बुख़ारी और उनके समर्थकों ने लखनऊ में मीडिया और पुलिस की मौजूदगी में एक स्थानीय पत्रकार मोहम्मद वहीद चिश्ती को गालियाँ दीं, पीटा और जान से मारने की धमकियाँ दीं. चिश्ती की रिपोर्ट पर पुलिस ने अहमद बुख़ारी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया है.

बुख़ारी अयोध्या मामले पर एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, जिसमे उन्होंने हाईकोर्ट के फ़ैसले की यह कहते हुए निंदा की कि यह फ़ैसला, उनके शब्दों में, संविधान और क़ानून के बजाय आस्था के आधार पर दिया गया है इसलिए मुसलमान उसे हरगिज़ नहीं मानेंगे.

'कांग्रेस पर आरोप'

बुख़ारी ने पहले मामले के मुख्य मुद्दई हाशिम अंसारी का मज़ाक उडाया. फिर कहा कि आर्किलोजिकल सर्वे आफ़ इण्डिया की रिपोर्ट बदल दी गयी थी. बुख़ारी बोलते बोलते यहाँ तक कह गए कि कांग्रेस सरकार ने तीनों जजों पर दबाव डालकर उनका फ़ैसला बदलवाया.

सवाल जवाब के बीच स्थानीय अख़बार 'दास्ताने अवध' के संपादक मोहम्मद वहीद चिश्ती ने एक सवाल पूछा कि विवादित ज़मीन पहले राजा दशरथ की थी तो उस पर राम चंद्र का हक़ क्यों नहीं? सवाल सुनते ही मौलाना बुखारी भड़क गए. टीवी कैमरों की परवाह न करते हुए बुखारी ने उन्हें कांग्रेस एजेंट और ग़द्दार आदि कहा और फिर धमकी देते हुए कहा, चुपचाप बैठ जा, बैठ जा छुपकर. बैठ जा. नहीं तो वहीं आकर गर्दन नाप दूंगा.’’

बुख़ारी का ग़ुस्सा

प्रेस कांफ्रेंस ख़त्म होते ही बुखारी गुस्से में उठे और पत्रकार वहीद चिश्ती को गालियाँ देते हुए अपने साथियों को उसे मारने के लिए ललकारा. कैमरे वाले फोटो खींच रहे थे और पुलिस वाले बुखारी को रोक रहे थे, मगर वे धक्का देते हुए पत्रकार वहीद चिश्ती को एक किनारे ले गए और कई थप्पड़ मारे.

Image caption अहमद बुख़ारी पहले भी मीडिया से उलझ चुके हैं

पत्रकारों और पुलिस ने किसी तरह वहीद को बचाकर बाहर निकाला. फिर भी बुखारी का गुस्सा शांत नही हुआ. पत्रकारों के सवालों के बीच उन्होंने अपने साथियों से फिर कहा, "मारो निकाल बाहर करो इसको. समझता है हमने चूडियाँ पहनी हुई हैं. मारेंगे भी, निकालेंगे भी. हम एजेंट को, मुसलमानों के ग़द्दारों को बर्दाश्त नही कर सकते".

उनके साथियों ने लखनऊ के एक मशहूर इमाम मौलाना ख़ालिद रशीद को भी बुरा भला कहा.

पत्रकार वहीद चिश्ती का कहना था कि वह अख़बार निकालने के अलावा अखिल भारतीय सूफी संत सेवा समिति के अध्यक्ष हैं और प्रेस कांफ्रेंस में सवाल पूछकर उन्होंने कोई गलती नही की. चिश्ती ने कहा, "सबसे आगे बढ़कर बुख़ारी साहब ने मारना शुरू किया. सारे लोगों ने मुझे मारा पीटा. मीडिया इस बात की गवाह है. क्या प्रेस के किसी आदमी को सवाल पूछने का हक़ नही है".

चिश्ती ने बाद में पुलिस थाने जाकर बुख़ारी के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी कायम करा दिया. पुलिस के अनुसार बुख़ारी के खिलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 506 के तहत मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मुक़दमा कायम किया गया है.

'व्यवहार ठीक नहीं'

कई संगठनों और नेताओं ने बुख़ारी के इस व्यवहार की निंदा की है.

लखनऊ के मशहूर इमाम मौलाना ख़ालिद रशीद फिरंगी महली ने एक बयान में कहा, "मज़हबी लिहाज़ से एक इमाम का यह व्यवहार ठीक नही है. उलेमा को यह शोभा नही देता. ख़ालिद रशीद के अनुसार बुख़ारी का व्यवहार लखनऊ की सभ्यता के भी ख़िलाफ़ है".

अयोध्या मामले पर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की मीटिंग 16 अक्टूबर को होने वाली है और मौलाना बुख़ारी ने उससे पहले लखनऊ आकर यहाँ के शांत माहौल को गरमा दिया है.

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