अपहृत कर्मचारियों में से तीन रिहा

  • 15 अक्तूबर 2010
माओवादी
Image caption माओवादियों के ज़रिए अपहरण की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में संदिग्ध माओवादी छापामारों के ज़रिए अपहृत किए गए पांच में से तीन लोगों को रिहा कर दिया गया है.

इन लोगों को इलाके की महादेव घाटी से रिहा किया किए जाने की ख़बर है.

अपहृत लोगों में से एक सरकारी वाहन चालक नागेश की पत्नी ने बताया कि उनकी अपने पति से बात हुई है और उन्हें रिहा कर दिया गया है.

ग़ौरतलब है कि गुरुवार को जिन पांच सरकारी कर्मचारियों का अपहरण किया गया था उन्हें लेकर न पुलिस के आला अधिकारियों ने ख़बर कि पुष्टि की थी और ना ही खंडन. मगर बीजापुर में मौजूद स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि यह सभी कर्मचारी अपने परिवारों के साथ भोपालपटनम से बीजापुर आ रहे थे.

इसी बीच जिस यात्री बस में सवार होकर यह कर्मचारी जा रहे थे, उसे हथियारबंद माओवादी छापामारों ने रुकवाया और एक एक कर इन सरकारी कर्मचारियों को वाहन से उतर लिया. अग़वा किए गए कर्मचारियों में एक सरकारी ड्राईवर है जबकि अन्य चार लिपिक हैं.

इनमें से दो बीजापुर के कलेक्टर के कार्यालय में कार्यरत हैं जबकि दो भोपालपटनम जनपद पंचायत के कार्यालय में पदस्थापित हैं.

खबरें हैं कि जब हथियारबंद माओवादी इन कर्मचारियों को बस से उतार रहे थे तो इनके परिजनों नें उनसे काफ़ी गुहार लगाई. मगर माओवादी उन्हें यह कहते हुए अपने साथ ले गए कि पूछ ताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया जाएगा. बीजापुर में माओवादियों द्वारा एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों के अपहरण से प्रशासन सकते में आ गया है.

इसके अलावा बीजापुर और भोपालपटनम मार्ग पर माओवादियों नें सरकारी जन वितरण प्रणाली कि दो बसों को आग के हवाले कर दिया. बस्तर संभाग के ही कांकेर ज़िले में भी माओवादियों नें एक निर्माण कम्पनी के पांच वाहनों को भी फूँक दिया है.

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