रावण का बीमा

रावण दहन से पहले पुतले

लंकापति रावण तो खुद समाज के लिए खतरा था मगर अब उसके पुतले को जलने से पहले कोई ख़तरा न हो और दहन के दौरान कोई हादसा भी न हो, इसके लिए राजस्थान में दशानन और उसके कुनबे का चौबीस घंटे का बीमा कराया गया है.

राजस्थान के उदयपुर में 'सनातन धर्म सेवा समिति' ने रावण और उसके परिजनों के पुतलों का कोई पचास लाख का बीमा कराया है.

समिति के अध्यक्ष गुरमुख दास कस्तूरी ने बीबीसी को बताया, "हमने इन पुतलों का बीमा सुरक्षा की वजह से करवाया है."

इस समिति में ज़्यादातर वो लोग है जो भारत विभाजन के दौरान बलूचिस्तान से आये और फिर उदयपुर को अपना घर बना लिया.

इन लोगों की नुमाइंदगी करने वाली 'बलूचिस्तान पंचायत' के अध्यक्ष नानकराम कस्तूरी ने बीबीसी को बताया कि उदयपुर ने रावण दहन और दशहरे का प्रमुख आयोजन उनकी संस्था ही करती है.

दुर्घटना से सुरक्षा के लिए बीमा

नानकराम कस्तूरी ने बीबीसी को बताया, "यूँ तो हम 1958 से इसका आयोजन करते रहे हैं. ये हमारा साठवां आयोजन है, मगर रावण और उसके भाईबंधुओं का बीमा करवाने का विचार तीन साल पहले आया. तब से लगातार हम बीमा करा रहे हैं. क्योंकि कोई हादसा हो जाए तो ठीक नहीं होता, इसमें बीमा से मदद मिलती है."

इस बीमे में लंका प्रमुख रावण, उसके भाई कुम्भकरण और मेघनाद शामिल हैं. बीमे की ये सुरक्षा रावण दहन से पहले और उसके दौरान भगदड़ या अन्य कोई दुर्घटना की सूरत में मदद करेगी.

इस बार उदयपुर में इस संस्था के कहने पर लंकापति और उसके कुनबे के पचास फ़ुट से ज़्यादा ऊँचे पुतले खड़े किए गए हैं.

इन पुतलों के साथ लंका भी है, बीमा आवरण में लंका बस्ती की हिफ़ाज़त भी शामिल है. आयोजकों ने इसके लिए भारत की एक बीमा कम्पनी को 2,800 का बीमा शुल्क भी चुकाया है. पौराणिक कथा पर भरोसा करें तो रावण को पता तब भी था कि राम के हाथों उसका वध होना तय है, मगर तब रावण को इतना जरूर यकीन था कि दशरथ पुत्र राम से पहले कोई उसको छू नहीं सकेगा.पर अब इसकी कोई जमानत देने को तैयार नहीं है.शायद इसीलिए लंकेश को बीमा की जरूरत आन पड़ी है.

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