'अभिनव भारत के ख़िलाफ़ जाँच में सुस्ती'

  • 18 अक्तूबर 2010
हेमंत करकरे
Image caption हेमंत करकरे पहले अधिकारी थे जिन्होंने मालेगावं धमाके में अभिनव भारत का हाथ होने की बात कही थी.

मुंबई में 26/11 के हमलों में आतंकवाद विरोधी शाखा(एटीएस) प्रमुख हेमंत करकरे की मौत के बाद क्या अभिनव भारत और हिंदू चरमपंथियों के बारे में जाँच एजेंसियों की कार्रवाई में सुस्ती आई है?

मालेगाँव में रहने वाले लोग और कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि हेमंत करकरे के समय में अभिनव भारत को लेकर जिस तरह से तेज़ी से काम हो रहा था, उसमें कमी ज़रूर आई है.

मालेगाँव निवासी और पत्रकार अब्दुल हलीम सिद्दीक़ी कहते हैं, "जबसे हेमंत करकरे की मौत हुई है, नए एटीएस प्रमुख राकेश मारिया ने यहाँ का कोई दौरा नहीं किया है, स्थानीय लोगों से कोई बातचीत नहीं की है. आख़िर जो लोग यहाँ पर आए, वो कहीं तो रुके होंगे, उन्हें स्थानीय मदद तो मिली होगी. आज तक उसके बारे में कुछ भी पता नहीं चला".

मुंबई स्थित वकील शकील अहमद कहते हैं कि करकरे की मौत के बाद अभिनव भारत से जुड़ी जाँच के दायरे को नहीं बढ़ाया गया है. लेकिन जाँच एजेंसियाँ किसी तरह की ढिलाई से इंकार करती हैं.

दरअसल माना जा रहा है कि अभिनव भारत मालेगाँव के अलावा, अजमेर, समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद धमाके के लिए भी ज़िम्मेदार है.

राजस्थान एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में माना कि जाँच में ढिलाई की शंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं, लेकिन ऐसा होने से उन्होंने इनकार किया.

उनका कहना था, "ढिलाई की बात ग़लत है. हमने इस मामले में दो लोगों (देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा) को गिरफ़्तार किया था. हम उन्हें मक्का मस्जिद धमाके की जाँच के मामले में हैदराबाद भी ले गए थे".

उनके मुताबिक़ इन सभी घटनाओं के पीछे एक ही गुट का हाथ है, हालांकि वो और कुछ कहने से इनकार करते हैं.

समझौता ट्रेन धमाके की जांच एनआईए के हाथ में है, अजमेर ब्लास्ट की जाँच राजस्थान एटीएस कर रही है. मुंबई एटीएस मालेगाँव धमाकों की जाँच कर रही है, जबकि मक्का मस्जिद धमाकों की जाँच सीबीआई कर रही है.

एक तरफ़ जहाँ मामले में ढिलाई की बात हो रही है, एक दूसरे अहम बिंदु पर कोई भी कुछ बोलने से कतरा रहा है.

अगर आप मालेगाँव धमाकों से जुड़े दस्तावेज़ों को पढ़ें तो अभिनव भारत के इसराइल और नेपाल से संबंधों के बारे में बात की गई है.

दरअसल पुलिस के मुताबिक़ मालेगाँव धमाकों के बारे में योजना वर्ष 2008 में अभिनव भारत की चार बैठकों में बनाई गई. वर्ष 2007-08 के दौरान अभिनव भारत के सदस्यों के बीच कई गुप्त बैठकें हुईं. इस बैठक की रिक़ॉर्डिंग सुधाकर द्विवेदी के पास से मिली. पुलिस की जाँच में इस रिकॉर्डिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसराइल और नेपाल से संबंधों की बात भी इन्हीं रेकॉर्डिंग से सामने आई है. सदस्यों की बेबाक बातचीत से उनकी सोच, उनके ज़हन का अंदाज़ा मिलता है.

फ़रीदाबाद में हुई एक बैठक में कर्नल पुरोहित ने कहा था, "इसराइल से मैने जो संपर्क किया है, हमारा एक कैप्टेन इसराइल होकर आ गया है. उनकी तरफ़ से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली. उन्होंने ये कहा है कि आप हमें ज़मीन पर कुछ दिखाएं. मतलब अभी हमारी वेबसाइट भी लाँच नहीं हुई है. हमने उनसे चार चीज़ें मांगी थी- लगातार हथियारों की आपूर्ति और ट्रेनिंग, तेल अवीव मेंं हमारे दफ़्तर की शुरुआत जिसमें भगवा झंडा लहराए, राजनीतिक शरण और संयुक्त राष्ट्र में हिंदू राष्ट्र की हमारी मांग का साथ. उन्होंने दो चीज़ों को मान्यता दे दी. दो को मान्यता नहीं दी. वो हमारा राष्ट्रीय झंडा तेल अवीव में नहीं फ़ैलाना चाहते. बोलते हैं कि भारत के साथ संबंध ठीक हो रहे हैं".

नेपाल के बारे में पुरोहित का कहना था, "किंग ज्ञानेंद्र के साथ हमारी मीटिंग तय थी 24 जून 2006 और 2007 को पिछले साल. और ये मीटिंग हमारी तय हुई थी 13 फ़रवरी को टेलीफ़ोनिकली. और एक कर्नल प्रजवाल करके हैं. प्रजवाल को इंटेलिजेंस में अभी ब्रिगेडियर बनाया गया है. वो हमने उनके लिए बहुत कष्ट करके ये मीटिंग की थी. मेरा उनको ये प्रस्ताव था. राजा ने हमारा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. मेरे बीस लोग आपके यहाँ पे अफ़सर बनके ट्रेनिंग करेंगे".

यानि अगर अभिनव भारत के सदस्यों के बीच हुई इन कथित बातों को माना जाए, तो एक हिंदू राष्ट्र बनाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, जिसके झंडे का प्रारुप तय हो चुका था और इसराइल और नेपाल जैसे राष्ट्रों में लोगों से कथित तौर पर संबंध स्थापित हो चुके थे.

जाँच से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक़, ‘चाहे वो इसराइल से जुड़ा ऐंगल हो या फिर नेपाल से जुड़ा, कोई भी मामला हलका नहीं है. सभी गंभीर है. इसराइल और नेपाल में ऐसे लोग थे जिनका संपर्क अभिनव भारत से था. अभिनव भारत में कोई भी डींग नहीं हांक रहा है.’

अभिनव भारत के सदस्यों के बीच हुई बातचीत से एक और बात सामने आती है. सदस्य कई बार कुछ और लोगों का नाम लेते हैं जिनसे वो संपर्क में थे.

बातचीत में कर्नल आदित्य धर, मेजर पराग मोदक, कर्नल प्रज्वल जैसे लोगों का नाम आता है. क्या अभिनव भारत से जुड़े और लोगों की जाँच की जा रही है, इस संस्था का दायरा कितना बड़ा था? केस से जुड़े अधिकारी इस बारे में भी बोलने से इनकार करते हैं, लेकिन विश्वास दिलाते हैं कि सभी लोगों के बारे में जाँच हो रही है.

अभिनव भारत

समीर कुलकर्णी, साध्वी प्रज्ञा, मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चुतुर्वेदी, सुधाकर द्विवेदी उर्फ़ दयानंद पांडे, कर्नल प्रसाद पुरोहित, अजय राहिरकर. ये सभी अभिनव भारत से जुड़े थे. पुलिस के मुताबिक़ अभिनव भारत के पीछे मुख्य दिमाग़ कर्नल पुरोहित थे जिन्होंने जून 2006 में 16 लोगों के साथ अभिनव भारत ट्रस्ट की शुरुआत की थी.

Image caption साध्वी प्रज्ञा की गिरफ़्तारी पर प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने क़ड़ी आपत्ती जताई थी.

गुट की अगली बैठक उसी साल 16 दिसंबर को हुई. ट्रस्ट की पहली आधिकारिक बैठक पुणे में फ़रवरी 2007 में हुई. ट्रस्ट का आधिकारिक पता था: 16/04, संत क्रुपा, कर्वे रोड, पुणे. ये पता दरअसल ट्रस्ट के ख़जाँची अजय राहिरकर का पता था.

पुलिस के मुताबिक़ एक और बैठक सितंबर 2007 में देवलाली में हुई जिसमें भाजपा के पूर्व सांसद बीएल शर्मा प्रेम भी शामिल थे. शर्मा ने नासिक में हुई एक बैठक में अखंड और हिंदू भारत बनाने की बात की थी.

पुलिस के मुताबिक़ अभिनव भारत की योजना उन कामों को करने की थी जिनमें संघ परिवार नाकाम हुआ और उनका संपर्क कट्टरपंथी प्रवीन तोगड़िया से था.

संविधान

दस्तावेज़ों के मुताबिक़ अभिनव भारत ने हिंदू राष्ट्र के लिए कथित तौर पर एक संविधान की रूपरेखा भी तैयार कर ली थी.

'एक भगवे रंग का झंडा होगा जिसका सुनहरा किनारा होगा. इसमें चार मशालें होंगी जो चार वेदों की परिचायक होंगी. संस्था का आधिकारिक गाना वंदे मातरम होगा.

राष्ट्र का ध्येय होगा आक्रामक राष्ट्रीयता. एक पार्टी का राज्य सबसे बेहतर होगा. प्रजातीय स्थिरता के लिए ज़बरदस्ती प्रवासन को बढ़ावा दिया जाएगा.

सार्वजनिक मौत की सज़ा दी जाएगी. गोहत्या पर रोक होगी. कॉमन सिविल कोड को लागू किया जाएगा. रक्षा मंत्रालय को युद्ध मंत्रालय में बदल दिया जाएगा. सैनिकों की संख्या 14 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दी जाएगी. वायुसेना में चितपवण ब्राह्मणों की भर्ती की जाएगी.

नेपाल, थाईलैंड, कंबोडिया जैसे देशों से दोस्ती की जाएगी ताकि बौद्ध और हिंदू देश इस्लामिक और ईसाई देशों के विरुद्ध खड़े हों. लेकिन कुछ मॉडरेट इसाई अभिनव भारत के साथी हो सकते हैं. नाभकीय कार्यक्रम आक्रामक होगा.

अभिनव भारत की राष्ट्रीय कमेटी का नाम होगा केंद्रीय हिंदू राष्ट्र. धरती का कोई भी हिदू इसका सदस्य हो सकता है. लक्ष्य होगा जात-पात का ख़ात्मा.

जो लोग हिंदू राष्ट्र के विरुद्ध होंगे, उनका राजनीतिक बहिष्कार. और कुछ लोगों को मार देना चाहिए'.

दो ‘ऑपरेशन’

एक बातचीत के दौरान पुरोहित ने कहा था, "मैं कुछ ऐसा कर रहा हूँ जो पहले नहीं कहा गया. हमने दो ऑपरेशन किए थे. वो दोनो सफल हुए थे. मैं ऑपरेशन करने में सक्षम हूँ. हमारे पास उपकरणों की कमी नहीं है".

स्वामी अमृतानंद से एक बातचीत के दौरान मेजर उपाध्याय ने कहा, "अभिनव भारत के कुछ सदस्यों का इस्तेमाल मुसलमानों और ईसाई समुदायों में भय फैलाने के लिए किया जाना चाहिए. इसे ज़िंदा रखना चाहिए जैसे हैदराबाद मस्जिद में धमाके से किया गया. आईएसआई से कोई व्यक्ति शामिल नहीं था. ये हमारे एक व्यक्ति का काम था. ये बात अपनी जानकारी के आधार पर कह सकता हूँ".

अभिनव भारत का दायरा कितना बड़ा था? क्या पुरोहित ने कुछ और लोगों को अपने नियंत्रण या विश्वास में लिया था? अभी ऐसे न जाने कितने और सवाल हैं जिनके सवाल दिए जाने बाक़ी हैं.

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