शुरु हुई सुनवाई,कसाब 'बेपरवाह' नज़र आए

  • 18 अक्तूबर 2010

सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अजमल आमिर कसाब से जुड़ी उस याचिका पर सुनवाई शुरु हुई जिसमें उन्हें दी गई मौत की सज़ा को चुनौती दी गई है.2008 में हुए मुंबई हमले के कसाब एकमात्र जीवित हमलावर हैं.

इस साल मई में एक विशेष अदालत ने विभिन्न आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद कसाब को मौत की सज़ा सुनाई थी. जिसके बाद कसाब ने सज़ा को चुनौती दी है. सुरक्षा चिंताओं के कारण कसाब को कोर्ट में पेश नहीं किया गया था, वे वीडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग के ज़रिए लाइव थे.

सोमवार को करीब पांच घंटे कोर्ट की कार्रवाई चली. अभियोजन पक्ष के वकील उज्जवल निकम ने अदालत में उन सब गवाहों के बयान पढ़े जिन्होंने सुनवाई के दौरान गवाही दी है.

लाइव कॉन्फ़्रेंन्सिंग के दौरान कसाब ने क़ैदियों को पहनाए जाने वाले कपड़े पहन रखे थे. बीबीसी संवाददाता विनीत खरे के मुताबिक कसाब सुनवाई के दौरान कभी जम्हाई ले रहे थे तो कभी सर नीचे करके खड़े रहे जैसे उनकी ज़्यादा रुचि न हो..एक बार तो वे मुस्कुराए भी.

हाईकोर्ट कसाब की यह अर्ज़ी नामंज़ूर कर चुका है कि इस सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से या फिर जेल प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौजूद न रहें.

माना जा रहा है कि यह सुनवाई तीन महीनों में पूरी हो जाएगी.

इसके दौरान वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक पीठ विशेष अदालत में कसाब के ख़िलाफ़ पेश किए गए सबूतों को फिर से परखेगी.

अभियोजन पक्ष के वकील उज्जवल निकम ने बीबीसी से ख़ास बातचीच में दावा किया है कि कसाब के ख़िलाफ़ सरकार के पास पुख्ता सबूत हैं और हाईकोर्ट में उनकी दावेदारी मज़बूत है.

लेकिन हाईकोर्ट में हो रही सुनवाई कसाब का अंतिम क़ानूनी अधिकार नहीं है.

यदि हाईकोर्ट में भी अजमल क़साब की हार होती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार होगा और इसके बाद राष्ट्रपति के सामने सज़ा माफ़ करने करने के लिए अपील भी की जा सकती है.

नवंबर, 2008 में क़साब सहित दस लोगों ने भारत की व्यावसायिक राजधानी में अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई थीं और हथगोले फेंके थे.

इसमें कम से कम 170 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे.

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