भारत प्रशासित कश्मीर में तीन घायल

  • 19 अक्तूबर 2010
मसर्रत आलम

भारत प्रशासित कश्मीर में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में गोली लगने से कम से कम तीन लोग घायल हो गए.

उत्तरी कश्मीर के बारामुला में पत्थर फेंक रहे लोगो पर पुलिस ने फ़ायरिंग की जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया. घायल प्रदर्शनकारी को इलाज के लिए श्रीनगर लाया गया है.

दक्षिणी कश्मीर के शोपियान में कर्फ़्यू नहीं था. वहां प्रदर्शकारियों ने केंद्रीय सुरक्षा बल सीआरपीएफ़ के एक मोटरकेड पर पत्थर फेंका जिसमें सीआरपीएफ़ के एक असिसटेंट कमांडेंट को चोटे आई. बाद में सीआरपीएफ़ की जवाबी कार्रवाई में छर्रे लगने से दो लोग घायल हो गए.

इसके अलावा एक निजी गांड़ी में जा रही एक महिला को भी मामूली चोटें आई.

राजधानी श्रीनगर के पुराने शहर में कर्फ़्यू दिन भर जारी रहा लेकिन शहर के दूसरे इलाक़ो में दिन के एक बजे के बाद ढील दी गई थी.

राज्य के दूसरे शहरों से छिटपुट झड़पों की ख़बर है लेकिन कहीं से किसी बड़ी वारदात की कोई ख़बर नहीं है.

एक अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की गिरफ़्तारी के बाद एहतियात के तौर पर मंगलवार को कश्मीर घाटी के अधिकांश इलाक़ों में कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया गया था.

मसर्रत आलम को सोमवार रात को श्रीनगर के बाहरी इलाक़े तलबल से गिरफ़्तार किया गया.

पुलिस महानिदेशक एसएम सहाय ने बीबीसी से कहा,''जी हाँ, हमने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है.''

पुलिस का मानना है कि मसर्रत की गिरफ़्तारी एक बड़ी कामयाबी है और उनकी गिरफ़्तारी के बाद घाटी में हालात सुधरेंगें.

मसर्रत जून में भारत सरकार के ख़िलाफ़ 'कश्मीर छोड़ो' आंदोलन छेड़े जाने के बाद से भूमिगत थे.

हालांकि सैयद अली शाह गीलानी ने अगस्त में अपनी रिहाई के बाद इस आंदोलन की कमान संभाल ली थी.

आलम को पृथकतावादी नेता सैयद अली शाह गीलानी का क़रीबी और उन्हें कश्मीर घाटी के प्रदर्शनों के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि कश्मीर छोड़ो आंदोलन के बाद कश्मीर घाटी में बंद और प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया था.

इस आंदोलन के कारण पिछले चार महीनों में जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फ़ायरिंग में सौ से अधिक लोग मारे गए हैं.

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