दो और किसानों की आत्महत्या

भारतीय किसान
Image caption बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या की है

आंध्र प्रदेश में माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियों के ख़िलाफ़ उठने वाला तूफ़ान अब और भी गहरा हो गया है. शुक्रवार को राज्य में दो और व्यक्तिओं ने आत्महत्या कर ली.

इनमें गुंटूर ज़िले का एक किसान और हैदराबाद के निकट बलानगर इलाक़े की एक घरेलू महिला शामिल हैं. दोनों ने ही माइक्रो फ़ाइनैंस संस्थाओं से ऋण लिया था लेकिन समय पर उसे लौटा नहीं सके और कंपनी के एजेंटों के उत्पीड़न के चलते उन्होंने अपनी जान दे दी.

इसी के साथ राज्य में इस वर्ष माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियों के उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर लेने वालों की संख्या 40 को पार कर गई है. हालाँकि गत सप्ताह ही राज्य सरकार ने माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियों की धांधलियों और लोगों को परेशान करने की घटनाओं की रोकथाम के लिए एक अध्यादेश जारी किया था और उस पर अमल भी शुरू हो गया है लेकिन आत्महत्याओं की घटनाएँ जारी हैं. इधर माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियों को एक और धक्का उस समय लगा जब आंध्र प्रदेश उच्य न्यालय ने अध्यादेश पर रोक लगाने उनकी याचिका को रद्द कर दिया और कहा कि ऐसी सभी कंपनियों को आगामी एक सप्ताह के अंदर सरकार के पास अपना पंजीकरण करवाना होगा.

साथ ही अदालत ने सरकार से कहा कि अगर ये कंपनी क़ानून के दायरे में रहते हुए काम करती हैं तो वो अपने ऋण की वसूली की कोशिश कर सकती है लेकिन अगर उन्होंने लोगों को परेशान किया तो उनके विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज किए जाएँ.

राजनीतिक रंग

इधर यह मामला अब राजनैतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है. विधान सभा में विपक्ष के नेता और तेलुगूदेशम के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने मेंदक ज़िले में ऐसे तीन परिवारों से भेंट की जिनके सदस्यों ने आत्महत्या कर ली थी.

नायडू ने ऐसे हर परिवार को 50 हज़ार रुपए की सहायता राशि दी और आगे भी उनकी सहायता का वादा किया. नायडू ने आरोप लगाया की सरकार की विफलता के कारण ही इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं और माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियाँ माफ़िया की तरह काम कर रही हैं. उन्होंने इस स्थिति के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को भी ज़िम्मेदार ठहराया क्योंकि उसने माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियों को अधिकार दिया है कि वो अपना ब्याज़ दर ख़ुद ही तय करें.

उन्होंने मांग की कि बैंक किसी बिचौलिए को बीच में लाए बिना सीधे महिलाओं के स्वयं सहित ग्रुपों और किसान मित्र ग्रुपों को ऋण दें ताकि वो माइक्रो फ़ाइनैंस कंपनियों पर निर्भर न रहें.

नायडू की मांग थी की सरकार आत्महत्या करने वालों के ऋण माफ़ करे और उनके परिवारों में से हर एक को पांच लाख रुपए की सहायता दे.

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