कोल इंडिया के बुलंद इरादे

  • 23 अक्तूबर 2010
कोल इंडिया

कोल इंडिया लिमिटेड के आईपीओ ने जैसे बाज़ार में तहलका मचा दिया है. इसमें लोगों की भारी दिलचस्पी इसी बात से ज़ाहिर होती है कि इसमें 236 हज़ार करोड़ के करीब की रुचि उत्पन्न की है.

इस आईपीओ के माध्यम से कंपनी ने 10 प्रतिशत विनिवेश किया है.

आईपीओ की मांग उपलब्धता से 15 गुना से ज़्यादा है. चाहे वो संस्थागत निवेशक हों या फिर फुटकर या रिटेल, सभी ने कंपनी के आईपीओ में रुचि दिखा है.

हमने कोलकाता फ़ोन कर कंपनी चेयरमैन पीएस भट्टाचार्य से पूछा कि क्या उन्हें ऐसे परिणाम की उम्मीद थी, तो उनका कहना था, "मैं एक अच्छी उपलब्धि की उम्मीद कर रहा था क्योंकि मुझे पता था कि कंपनी में काफ़ी मज़बूती है. हमें कहा गया था कि क़रीब आईपीओ की मांग 11 या 12 गुना हो सकती है, लेकिन इसके 15 गुना होने पर हमारी उम्मीद से अच्छा था. लोगों को अच्छा लगा कि ये कंपनी उत्पादन और रिज़र्व की बात करें तो दुनिया की सबसे बड़ी कोयला कंपनी है. साथ ही कंपनी को पता है कि भविष्य में मुनाफ़े में कैसे बढ़ोत्तरी करनी है."

कंपनी कई महीनों से इस आईपीओ की तैयारी कर रही थी. चाहे वो मीडिया में विज्ञापन हों या फिर रोड शो.

उत्तरदायित्व

भट्टाचार्य कहते हैं, "जब भी हम या कंपनी के निदेशक देश के बाहर जाते थे, तो कोशिश करते थे कि निवशकों से बातचीत हो, उन्हें कंपनी के बारे में या फिर उन्हें भविष्य की योजनाओं के बारे में बताएँ. पिछले डेढ़ साल से इसकी तैयारी चल रही थी. और जब कंपनी ने रोड शो किए तो पता चला कि लोगों को कंपनी के बारे में पता है."

विश्लेषकों के मुताबिक़ इन रोड शो ने कंपनी की काफ़ी मदद की. कंपनी को नवरत्न का ओहदा अक्तूबर 2008 में मिला था और उसे मार्केट में लिस्ट होने के लिए तीन साल का मौक़ा मिला था.

तो क्या हम दूसरी पब्लिक सेक्टर कंपनियों को बाज़ार में आते हुए देख सकते हैं, तो उस पर भट्टाचार्य का कहना था, "विनिवेश होने से कंपनी के ऊपर उत्तरदायित्व बढ जाता है. जो लोग हमारे शेयर में भागीदार होंगे, उनके प्रति हमारा उत्तरदायित्व बन जाता है. ये एक सकारात्मक प्रक्रिया है. कंपनी के बारे में ये जानना अच्छा है कि बाज़ार आपके बारे में क्या महसूस करता है. हमें तो पता नहीं था कि हम इतनी अच्छी कंपनी हैं. आज तो हम यही बोलेंगे, लेकिन आगे चलकर हम इतना अच्छा नहीं रहेंगे, तो बाज़ार हमें बता देगा."

वरिष्ठ पत्रकार औऱ विश्वेशक प्रतिम रंजन बोस कहते हैं कि जिस रफ़्तार से भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाएँ आगे बढ़ रही हैं, निवेशकों को कोल इंडिया में निवेश करने में फ़ायदा नज़र आया.

वो कहते हैं, "आप देख रहे हैं कि विदेशी निवशक भारत में आ रहा है. यूरोप में शेयरों के दाम गिरे हुए हैं. उनके आगे बढ़ने की ज़्यादा संभावना नहीं है. कोल इंडिया लिमिटेड के सफल होने का कारण है इसका दाम. इसके पहले जो बड़ी कंपनियाँ बाज़ार में आई थीं, जैसे एनएचपीसी या एनटीपीसी, उन मामलों में बाज़ार को ऐसा लगा था कि सरकार की उम्मीद ज़्यादा हैं."

कोल इंडिया लिमिटेड के शेयर के दाम 225 और 245 के बीच रखे गए थे.

योजनाएँ

अब जबकि कंपनी के आईपीओ ने उम्मीद से ज़्यादा अच्छा किया है, तो भविष्य में कंपनी की क्या योजनाएँ हैं?

भट्टाचार्य कहते हैं, "हम अब वैल्यू एडिशन करना चाहते हैं और इसका सबसे बड़ा रास्ता है वाशरीज़ जिससे कोयले में गुणवत्ता आएगी. हम बिना धुला हुआ कोयला सप्लाई करते हैं जिसकी गुणवत्ता अस्थिर है."

विश्लेषकों के मुताबिक़ हालांकि कोल इंडिया लिमिटेड के आईपीओ की सफलता से इरादे बुलंद हैं, लेकिन कोयला क्षेत्र में सुरक्षा, भ्रष्टाचार और पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं हैं.

इस पर पीएस भट्टाचार्य कहते हैं कि कोयला खनन उद्योग इन सभी मुद्दों से अलग नहीं रह सकता.

उनका कहना था, "दुर्घटनाएँ होंगी. अगर मैं आपसे कहूँ कि कल से कोई भी दुर्घटना नहीं होगी, तो ये मज़ाकिया बात होगी. सवाल ये है कि हम सुरक्षा के मुद्दे को कैसे निपटते हैं. सवाल ये है कि क्या हम सुरक्षा को मज़बूत बनाने के लिए क्या कर रहे हैं?"

उन्होंने कहा कि वे खनन उद्योग में सुरक्षा को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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