इन्द्रेश कुमार के बचाव में संघ और विहिप

  • 23 अक्तूबर 2010
अजमेर विस्फोट
Image caption जांच के बाद अजमेर विस्फोट में हिंदू चरमपंथियों की भूमिका सामने आई है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख पदाधिकारी इन्द्रेश कुमार ने एटीएस की चार्जशीट को एक मनगढ़ंत कहानी और राजनैतिक षड़यंत्र बताया है.

अजमेर धमाकों पर दाखिल चार्जशीट में अपने नाम के ज़िक्र के बाद एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा, "एटीएस ने मेरे ख़िलाफ़ एक मनगढ़ंत कहानी रची है. आरएसएस किसी भी तरह के सामाजिक और राजनैतिक हिंसा में यकीन नहीं करती है. मीडिया से मेरा अनुरोध है कि वह संघ और संघ के अधिकारियों की छवि ख़राब न करे."

शुक्रवार को अदालत में दाखिल आरोप-पत्र के मुताबिक़ विस्फोट की साज़िश रचने के लिए जयपुर में एक बैठक की गई थी जिसमें आरएसएस के पदाधिकारी इन्द्रेश कुमार शामिल थे.

पुलिस ने शुक्रवार को 'अजमेर धमाकों' में चार्जशीट पेश करके एक विवरण दाखिल किया और बताया कि कैसे आरएसएस के एक पदाधिकारी इन्द्रेश कुमार ने जयपुर में 31 अक्तूबर 2005 को हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और तय किया कि हिंदू धर्मस्थलों पर हमले हुए तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी.

जांच अधिकारियों के मुताबिक़ ये बैठक जयपुर में गुजराती समाज के गेस्ट हॉउस में हुई और इस बैठक में साध्वी प्रज्ञा सिंह, स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, लोकेश और अनेक लोग शामिल थे.

'दोषी हों तो दंड मिले'

इस चार्जशीट पर आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने बीबीसी से कहा, ''संघ किसी भी रूप में आतंकवाद का विरोध करता है. इस तरह के मामले में अगर किसी व्यक्ति पर कोई आरोप हैं तो उसकी सही ढंग से जांच हो और अगर वह दोषी पाया जाता है तो उसे दंड भी मिले.''

विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया ने इस चार्जशीट को लेकर सीधे सरकार पर निशाना साधा और इसे राजनैतिक षड़यंत्र बताया.

उन्होंने कहा, "श्रीनगर में पाकिस्तान के झंडे फहराने वाले, दिल्ली में आकर कश्मीर को पाकिस्तान बनाने का भाषण देने वालों से सरकार वार्ता कर रही है, उनको जम्मू-कश्मीर पुलिस में नौकरियां दे रही है. जिस संगठन का 80-90 साल का देशभक्ति का इतिहास है, उनको ऐसी गतिविधियों के साथ दिखाना सबसे बड़ा षड़यंत्र है."

तोगड़िया का कहना है, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्यों की देशभक्ति के बारे में आज तक किसी ने संदेह नहीं किया है. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद कहा, कहीं यह चार्जशीट चिदंबरम के वक्तव्य को साबित करने का राजनैतिक षड़यंत्र तो नहीं है."

इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "आरएसएस की राजनीति हमेशा से ही नकारात्मक रही है. उसने हमेशा समाज को अलग करने का काम किया है. हाल का प्रकरण महज़ इसकी एक अभिव्यक्ति है."

नामजद नहीं

इन्द्रेश कुमार आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य हैं और वर्ष 2002 से 2004 के बीच उनका मुख्यालय जयपुर था.

इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन को खड़ा किया और कई मुस्लिम कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ा.

राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन की एक प्रमुख बैठक भी उसी गुजरती समाज के गेस्ट हॉउस में हुई जहाँ पुलिस के मुताबिक इन्द्रेश कुमार ने हिंदू कार्यकताओं की बैठक की थी.

जाँच दल ने पाया कि इन लोगों ने चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक दल बनाया और असीमानंद ने गुजरात में अपने आश्रम में इन कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की.

बचाव पक्ष के एक सूत्र ने बीबीसी को बताया कि इन्द्रेश कुमार के बारे में जो कुछ भी कहा गया है, वो चार्जशीट का हिस्सा नहीं है. अलबत्ता जाँच अधिकारी ने इसका उल्लेख ज़रूर किया है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ जाँच अधिकारी ने चार्जशीट में कहा कि अभी कुछ गंभीर गोपनीय पहलुओं पर जांच जारी है.

जाँच अधिकारी ने आठ सौ पन्नों के आरोप पत्र में 22वें पृष्ठ पर इन्द्रेश कुमार और उस बैठक का उल्लेख किया है.

बेबुनियाद आरोप

जयपुर में आरएसएस के भारती भवन पर संघ के एक पदाधिकारी संजय ने बीबीसी से कहा, "इन्द्रेश कुमार पर आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है. दरअसल अयोध्या पर अदालत ने हिंदू संगठनों के पक्ष में फैसला दे दिया, अब कांग्रेस के पास कुछ नहीं बचा, सो वो बिहार में अल्पसंख्यक वोट रिझाने के लिए ये हथकंडे अपना रही है."

उन्होंने कहा, "इन्द्रेश कुमार एक देश भक्त हैं, उन्होंने चालीस साल पहले अपना जीवन सेवा के लिए समर्पित कर दिया. वो इंजीनियरिंग का पेशा छोड़कर देश सेवा में लग गए थे. ऐसे व्यक्ति पर नाहक आरोप लगाए गए हैं. केंद्र और राजस्थान में दोनों जगह कांग्रेस की सरकार है, हमें ऐसे आरोप पर कोई आश्चर्य नहीं होता."

राजस्थान पुलिस को स्वामी असीमानंद, रामजी और संदीप डानगे की तलाश है. इनमें दो लोग धमाकों के अभियुक्तों के रूप में नामजद हैं.

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