दूसरे चरण के मतदान के लिए कड़ी सुरक्षा

Image caption पहले चरण में भी सुरक्षा इंतज़ाम कड़े थे, लेकिन अब सख़्ती और बढ़ाई जाएगी

शिवहर ज़िले में नक्सली हमले की घटना को देखते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में 45 सीटों पर रविवार को हो रहे मतदान के लिए सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है.

राज्य के चुनाव आयोग ने उत्तरी बिहार के शिवहर और बेलसंड विधानसभा क्षेत्र में मतदान का समय सुबह 10 बजे से शाम के तीन बजे तक कर दिया है.

पुलिस के मुताबिक शुक्रवार का हमला नक्सली हमला था जिसमे छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है.

ये बिहार का नक्सल प्रभावित क्षेत्र है और कल की घटना ने राज्य सरकार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने की नई चुनौती पेश कर दी है. ये चुनौती आसान नहीं है.

पहले चरण में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए मतदान की खुशी को कल रात शिवहर ज़िले मे हुई वारदात ने गुम कर दिया है.

बढ़ी चौकसी

शनिवार को जब मैने इलाक़े का दौरा किया तो पुलिस की मौजूदगी तो नही दिखी लेकिन राज्य मुख्यालय के पुलिस प्रवक्ता पी के ठाकुर ने बताया कि चौकसी बढा दी गई है.

रविवार को सभी बूथों पर केन्द्रीय पुलिस बल के सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. पूरे इलाक़े का मुआयना करने के लिए तीन स्तर की टुकड़ियाँ होंगी और हवाई चौकसी भी होगी.

श्यामपुर भटहा पुलिसथाना इलाक़े के झिटकहियां गाँव के उस पुल के पास हमले मे क्षतिग्रस्त जीप अभी भी पड़ी हुई थी. वहीं मौजूद थे कल मतदान के लिए खुद को तैयार कर रहे मतदाता.

उनमें से एक तौसीफ़ आलम ने कहा कि वे सहमे तो हैं पर मतदान देने जाएंगे, "डर तो लग रहा है हमलोग को, जब प्रशासन का ये हाल हो जाएगा तो आम आदमी के बारे में क्या कहें. लेकिन फिर भी हमलोग वोट देने जाएंगे. धमकी से घर तो नहीं बैठा जा सकता है. पर इस घटना का मतदान प्रतिशत पर थोड़ा तो असर रहेगा."

जैसा कि तौसीफ़ कह रहे थे कि इन हमलों का मतदान प्रतिशत पर प्रभाव पड़ सकता है.

नक्सल प्रभाव

Image caption शिवहर में हुए नक्सली हमले ने चुनाव संबंधी सुरक्षा इंतज़ामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं

शिवहर ज़िला बिहार के उन 33 ज़िलों में से है जो नक्सल प्रभावित है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले चार सालों मे राज्य में 338 नक्सल हमले हुए हैं जिनमें 77 पुलिसकर्मी और 160 आम नागरिक मारे गए है.

नीतिश सरकार की इस बात पर आलोचना होती रही है कि वे नक्सलवादियों के प्रति नरम रैवया अपनाते हैं हालांकि नक्सल चुनौती से निपटने के लिए विशेष पुलिस बल SAP की नियुक्ति की सराहना भी की गई है.

असल चुनौती ये है कि राज्य के 80 हज़ार पुलिसकर्मियों के पास आधुनिक संसाधन नहीं है.

बिहार पुलिस एसोसिएशन के अनुसार नक्सल प्रभावित ज़िलों की कई पुलिस चौकियों के पास कोई ढांचागत सुविधा उपलब्ध नहीं है और इसीलिए वे नक्सली हमलों के आसान निशाने बन जाते हैं.

प्रशिक्षण की कमी, आधुनिक हथियारों की कमी, आबादी के हिसाब से बेहद कम पुलिस बल की नियुक्ति- ये सारी बातें राज्य पुलिस को हतोत्साहित करती ही होगी लेकिन फिलहाल इस घटना के बाद राजनीतिक पार्टियां बयान देने में व्यस्त हो गई है कि कौन-सी पार्टी ऐसी चुनौतियों से निपटने में ज्यादा सक्षम रही है.

इन सब के बीच रविवार को नक्सल प्रभावित क्षेत्र की 'ए' लिस्ट में से दो ज़िले सीतामढ़ी और शिवहर में मतदान होना है. सब ये देखना चाहेंगे कि क्या मतदान प्रतिशत इन चुनौतियों के बावजूद पहले चरण के मुक़ाबले ऊपर जाता है या नहीं.

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