न्याय की माँग करने पर जेल: अरुंधति

अरुंधति रॉय
Image caption अरुंधति रॉय के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है

जानी-मानी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने भारत प्रशासित कश्मीर के बारे में दिए वक्तव्य से उत्पन्न विवाद पर कहा है कि न्याय की माँग करने वालों को जेल भेजे जाने की माँग की जा रही है.

कश्मीर पर दिए बयान के कारण उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की आशंका जताई जा रही है.

इस बयान में उन्होंने कहा था कि 'कश्मीर कभी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा.'

अरुंधति रॉय ने मंगलवार को श्रीनगर से जारी बयान में कहा है, ''मैंने आज सुबह के अख़बारों को देखा जिसमें लिखा हुआ था कि श्रीनगर की सार्वजनिक सभाओं में मैंने जो कहा है, उसके लिए मुझे देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया जा सकता है.''

उनका कहना था, ''मैंने जो कहा है वो लाखों लोग हर दिन कहते हैं. मैंने जो कहा है जो टीकाकार वर्षों से लिखते और कहते आए हैं. यदि कोई मेरे भाषणों को गौर से देखे तो उनसे पता चलेगा, उनमें मूलरूप से न्याय की बात है.''

अरुंधति का कहना है, ''मैंने कश्मीरी लोगों के लिए न्याय की माँग की है जो दुनिया के सबसे नृशंस सैन्य शासन में रहते हैं... भारतीय ग़रीब इस सबकी कीमत अदा कर रहा है.''

बुकर पुरस्कार से सम्मानित इस लेखिका का कहना है, ''ये दुखद है कि देश उन लेखकों को चुप करा देना चाहता है जो अपनी बात कहना चाहते हैं. ये दुखद है कि जो न्याय चाहते हैं, उन्हें ये देश जेल भेज देना चाहता है जबकि सांप्रदायिक दंगे करवाने वाले, नरसंहार करने वाले, कॉरपोरेट घोटाले करने वाले, लुटेरे, बलात्कारी और ग़रीबों पर जुल्म ढहाने वाले खुले घूम रहे हैं.''

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों अरुंधति रॉय ने श्रीनगर में एक सेमिनार के दौरान कहा था, "कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है. यह ऐतिहासिक तथ्य है. भारत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है."

उन्होंने आरोप लगाया था कि ब्रितानी शासन से आज़ादी के बाद भारत ख़ुद औपनिवेशिक शक्ति बन गया है.

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