जम्मू: वार्ताकारों को लेकर उत्साह नहीं

Image caption प्रमुख वार्ताकर दिलीप पडगांवकर ने जम्मू कश्मीर यात्रा को उपयोगी बताया है

केंद्र सरकार के वार्ताकार चार दिन भारत प्रशासित कश्मीर में गुजारने के अब जम्मू में हैं. उनके इस दौरे में विरोध के स्वर भी उठे हैं.

यहाँ पहुंचते ही प्रमुख वार्ताकार दिलीप पडगांवकर ने कहा, "हमें मालूम है कि जो कश्मीर को सही लगता है वो जम्मू को सही नहीं लगता और लद्दाख को कुछ अन्य सही लगता है. इसलिए हमें आम सहमति बनानी है जिससे बीच का रास्ता निकल जाए."

जम्मू में सत्ताधारी गठबंधन में नेशनल कान्फ्रेंस और कांग्रेस को छोड़ सभी दलों ने केंद्र के इन वार्ताकारों के चयन की आलोचना की थी.

इन वार्ताकारों को राज्य में अलग अलग विचारधारा रखने वाले लोगों और संगठनों से मिलकर राज्य की समस्या का हल सुझाना है.

कुछ लोग इनसे मिलकर अपनी राय दर्ज करवा रहे है परंतु असंतोष की आवाज़ें भी साथ साथ उठ रही हैं.

जम्मू में इनके दो दिवसीय दौरे के दौरान कोई ख़ास उत्साह या उम्मीद दिखाई नहीं दे रही.

गुरुवार को इन्हें विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के अतिरिक्त वरिष्ठ नागरिकों से मिलना था. लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने वार्ताकारों का बहिष्कार किया.

विधायक दल के नेता चमन लाल गुप्ता इसका कारण बताते है, "यह संसद में पारित 1994 के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली बातें कर रहे हैं, कभी आज़ादी का खाका बनाने को कह रहे है तो कभी कुछ. हमें समझ नहीं आ रहा कि इन्हें क्या बताया गया है. यह गृह मंत्रालय की टीम है तो हमें लगता है कि वो अपनी बात इन वार्ताकारों द्वारा कह रहे है. हम ऐसी टीम से हर्गिज़ नहीं मिलेंगे."

विरोध

वहीं पैंथर्स पार्टी के प्रमुख भीम सिंह भी वार्ताकारों से नहीं मिले. उनका कहना था, "हमारे लिए ये हज़ारों पर्यटकों की तरह है जिनका हम स्वागत करते हैं लेकिन इससे ज्यादा इनकी कोई भूमिका नहीं है."

केंद्रीय वार्ताकार जम्मू के निकट विस्थापित कश्मीरी पंडितों के शिविर भी गए.

प्रसिद्ध कश्मीरी पंडित लेखिका शमा कौल कहती है, "हमें कोई विशेष उम्मीद इनसे नहीं है और न ही कोई संभावना इनसे जुड़ी है. लेकिन फिर भी हम एक उम्मीद कर रहे हैं."

कश्मीरी पंडित विस्थापितों ने वार्ताकारों को एक ज्ञापन दिया जिसमें कहा गया है,"हमें आज़ादी, स्वायत्तता या स्वशासन मंज़ूर नहीं है. हम तो केवल कश्मीर में सुरक्षित वापस लौटना चाहते हैं."

परंतु इस सब असंतोष के बावजूद प्रमुख वार्ताकार दिलीप पडगांवकर संतोष जताते हुए कहते हैं कि ये दौरा काफ़ी लाभदायक रहा.

वो कहते हैं, "हमने विभिन्न विचारधारा वाले लोगों से मुलाक़ात की जिसमें राजनेता,विद्यार्थी, शिक्षक, व्यापारी, सामाजिक संगठन और चरमपंथी शामिल हैं."

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