अशोक चव्हाण ने अपना बचाव किया

अशोक चव्हाण
Image caption अशोक चव्हाण का नाम मुंबई के एक हाउसिंग घोटाले में उभरा है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा है कि मुंबई में बनी आदर्श नगर सोसाईटी में कथित घोटाले से उनका कोई लेना देना नहीं है.

उन्होंने माना कि उनके रिश्तेदारों के इस सोसाइटी में मकान थे.

उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है.

मुंबई के महंगे कोलाबा इलाक़े में स्थित 31-मंज़िला आदर्श नगर सोसाईटी के बारे में कहा जा रहा है कि ये ज़मीन पूर्व सैनिकों और युद्ध में मारे गए लोगों की विधवाओं के लिए थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों ने इस ज़मीन को हड़पकर एक लंबी इमारत खड़ी कर दी है.

इसमें पूर्व सेनाध्यक्षों के अलावा कई राजनीतिज्ञ भी रहते हैं.

यहाँ रहने वाले लोगों में पूर्व सेनाध्यक्ष एनसी विज, दीपक कपूर, पूर्व जलसेनाध्यक्ष ऐडमिरल माधवेंद्र सिंह जैसे लोगों के नाम लिए जा रहे हैं.

सीबीआई इस मामले की जाँच कर रही है.

उधर पर्यावरण मंत्रालय ने भी कहा है कि उसने भी सोसाइटी को कोई क्लियरेंस नहीं दी थी.

अभी सोसाइटी भी यही कह रही है कि उनके यहाँ कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.

आरोप

रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि इस बिल्डिंग में मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के दो रिश्तेदारों के भी मकान हैं.

इस इमारत के बारे में ये भी कहा जाता है कि इसे बनाने के लिए कई नियमों का उल्लंघन किया गया था.

आरोप है कि इस इमारत के मात्र छह मंज़िलें बननी थीं लेकिन नियमों को ताक़ पर रखकर इसे 31-मंज़िला बना दिया गया.

इस पूरे मामले पर टाईम्स ऑफ़ इंडिया में रिपोर्ट छपी जिसमें पश्चिमी नेवल कमांड के फ्लैग कमांडिग इन चीफ़ वाईस ऐडमिरल संजीव भसीन के पत्र का हवाला दिया गया.

इसमें कहा गया कि उन्होंने सैन्य अधिकारियों और सरकार से इस सोसाइटी के ख़िलाफ़ शिकायत की थी.

उन्होंने अपने पत्र में कथित तौर पर शिकायत की कि ये सोसाइटी अपने सदस्यों के बारे में जानकारी नहीं दे रही है और महाराष्ट्र सरकार के पास भी कोई जानकारी नहीं है.

ये कहानी करगिल युद्ध के बाद शुरु हुई जब सेना ने इस ज़मीन को आदर्श नगर सोसाइटी के लिए खाली कर दिया.

आरोप है कि इस फ़ैसले में जो बड़े सैन्य अधिकारी या अफ़सर शामिल थे, सभी को इस सोसाइटी में फ़्लैट दे दिए गए.

मकान पानेवाले राजनीतिज्ञों में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के नेता शामिल हैं.

बहस की बात

बहस इस बात पर है कि ये ज़मीन सेना की है या नहीं.

मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने पत्रकारवार्त्ता में कहा कि ज़मीन सरकार की है , ख़ासकर राजस्व विभाग की.

उनका कहना था कि जब ज़मीन सोसाइटी को दी गई थी तब वो मुख्यमंत्री नहीं थे.

उन्होंने ये भी कहा कि ज़मीन करगिल की विधवाओं के लिए आरक्षित नहीं थी.

उनका कहना था कि उन्हें जो फ़्लैट आबंटित किया गया था, वो उन्होंने छोड़ दिया है.

रिश्तेदारों के फ्लैट्स होने के मामले पर उन्होंने कहा,"परिवार शब्द का क्या अर्थ है? किसी व्यक्ति का आपसे दूर का कोई रिश्ता है, ऐसे बहुत से लोग हैं जिनका दूर का रिश्ता हो सकता है. क्या किसी से दूर का रिश्ता होना आपके विरुद्ध जाना चाहिए?"

रिपोर्टों में ये भी कहा गया था कि अशोक चव्हाण की सास भगवती शर्मा भी इस सोसाइटी की सदस्य हैं और उन्हें भी एक फ्लैट दिया गया था. चव्हाण ने इस बात से इंकार नहीं किया, लेकिन ये कहा कि सरकार ये पता कर रही है कि ज़मीन किसकी है और अगर ये ज़मीन सरकार की है और इसे किसी सोसाइटी को दिया गया है तो कोई भी व्यक्ति इसका सदस्य बन सकता है.

कहा जा रहा है कि राजस्व विभाग ने इस बारे में एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें ये कहा गया है कि ज़मीन सरकार की है लेकिन ये रक्षा अधिकारियों के कब्ज़े में थी.

इस पूरे मामले पर चव्हाण के संबंध से कांग्रेस को परेशानी हो सकती है. उधर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की मांग की है.

पार्टी प्रवक्ता माधव भंडारी ने बीबीसी को बताया, "मुख्यमंत्री ने अपने लंबे चौड़े भाषण में नैतिकता की बात नहीं की है. मैं तो बहुत सालों में देख रहा हूँ कि केंद्र की शासकीय पार्टी एक राज्य में अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री की जाँच सीबीआई के करवाती है. और इसके बाद भी मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा देने की बात नहीं करता."

संबंधित समाचार