चंद्रबाबू पर हमला मामले में सज़ा

चंद्रबाबू नायडू
Image caption चंद्रबाबू नायडू पर उस समय हमला हुआ था, जब वे मुख्यमंत्री थे

आंध्र प्रदेश की एक अदालत ने सात वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर जानलेवा हमले के मामले में चार अभियुक्तों को दोषी पाया है और उन्हें सात वर्ष क़ैद की सज़ा सुनाई है.

तिरुपति की अतिरिक्त सत्र अदालत ने शुक्रवार को दिए गए अपने फ़ैसले में चार अभियुक्तों नक्सलवादी नेता पांडुरंगा राव उर्फ़ सागर और तीन अन्य को दोषी ठहराते हुए उन पर पाँच-पाँच हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

राज्य को हिला कर रख देने वाली एक घटना में नक्सलवादियों ने एक अक्तूबर 2003 को चंद्रबाबू नायडू की कार को बारूदी सुरंगों से उड़ा दिया था और उनकी बुलेटप्रुफ़ कार कई मीटर दूर जा गिरी थी.

लेकिन नायडू चमत्कारी ढंग से बच गए थे. उन्हें कुछ मामूली चोटें आई थी. उसी कार में सवार एक मंत्री बी गोपालकृष्ण रेड्डी और दो विधायक भी घायल हो गए थे. नक्सलवादी संगठन पीपुल्स वॉर ग्रुप ने इस हमले की ज़िम्मेदारी अपने सर पर ली थी.

इस मामले में कुल मिलकर 33 व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोग पत्र दाखिल किया गया था लेकिन उनमें से केवल चार पर ही अदालत में मुक़दमा चल सका.

नौ नक्सलवादी अभियुक्त विभिन्न भिडंतों में मारे गए जबकि बाक़ी पकडे नहीं जा सके. अभियोग पक्ष ने 76 गवाहों को अदालत में पेश किया.

जिन चार लोगों को सज़ा हुई है, उनमें विस्फोटक पदार्थों के तीन व्यापारी रामास्वामी रेड्डी, नागी रेड्डी और नागार्जुन शामिल हैं.

आरोप

उन पर नक्सलवादियों की सहायता का आरोप लगाया गया था क्योंकि नक्सलवादियों ने इस बड़े हमले के लिए उन्हीं से विस्फोटक पदार्थ ख़रीदे थे.

यह हमला उस समय किया गया था जब चंद्रबाबू नायडू और उनकी गाड़ियों का काफ़िला तिरुपति से तिरुमाला स्थित वेंकटेश्वर मंदिर के लिए जा रहा था.

जब यह काफ़िला तिरुमाला घाट रोड पर अलिपिरी नामक स्थान से गुज़र रहा था, नक्सलवादियों ने बारूदी सुरंगों का विस्फोट कर दिया और चंद्रबाबू नायडू की कार को निशाना बनाया.

नक्सलवादियों का कहना था कि नायडू के राज में कई वरिष्ठ नक्सलवादी नेताओं की मौत का बदला लेने के लिए उन्होंने यह कार्रवाई की थी लेकिन कुछ ग़लतियों के कारण वे सफल नहीं हो सके.

अभियुक्तों में शामिल दो बड़े नक्सली नेता पटेल सुधाकर रेड्डी और शाखामुरी अप्पा राव इसी वर्ष अलग-अलग झड़पों में मारे गए.

इस केस में अपना बयान देने के लिए चंद्रबाबू नायडू भी हाल ही में अदालत में पेश हुए थे और कहा था कि उनकी नक्सलवादियों से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी बल्कि वे उनकी हिंसा के ख़िलाफ़ थे और उन्होंने केवल राज्य के शासक के रूप में अपना कर्तव्य पूरा किया था.

अदालत की ओर से नक्सली नेता सागर को दोषी ठहराने पर कई लोगों को आश्चर्य हुआ है क्योंकि अभियोग पक्ष उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत या गवाह नहीं पेश कर सका.

फ़ैसले से नाराज़ सागर ने अदालत में ही नारे लगाए और उनके वकील ने कहा कि वे इस फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे.

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