कर्नाटक में फ़ैसला येदुरप्पा के हक़ में

येदुरप्पा
Image caption इस फ़ैसले को मुख्यमंत्री येदुरप्पा की जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

कर्नाटक में उच्च अदालत ने भारतीय जनता पार्टी के 11 बाग़ी विधायकों के निलंबन के फ़ैसले को सही ठहराया है.

कर्नाटक में इस मामले में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के फ़ैसले से बाक़ी जजों ने अपनी सहमति जताई है.

दस अक्टूबर को विश्वास मत से पहले राज्य विधानसभा के स्पीकर ने भाजपा के 11 बाग़ी विधायकों और पाँच निर्दलीय विधायकों को दल-बदल कानून के तहत निलंबित कर दिया था.

कर्नाटक विधान सभा के 11 ‘अयोग्य’ भारतीय जनता पार्टी विधायकों के मामले पर बंगलौर हाई कोर्ट की एक नई पीठ को दोबारा सुनवाई करनी पड़ी क्योंकि पहले की पीठ में जजों के बीच फ़ैसले पर मतभेद हो गया था.

अभी पाँच निर्दलीय विधायकों के मामले की सुनवाई एक तीसरी बेंच दो नवंबर को करेगी.

मामला

कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बी येदुरप्पा ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के निर्देश पर चार दिनों में दो बार विश्वास मत हासिल किया.

पहला मत 11 अक्तूबर को वॉयस वोट यानि ध्वनि मत से हुआ था मगर इसमें बाग़ी विधायकों को हिस्सा नहीं लेने दिया गया था जिसके कारण राज्यपाल ने इसे मानने से इंकार कर दिया था.

नाखुश येदुरप्पा दोबारा बहुमत साबित करने को राज़ी हो गए और फिर उन्होंने दो दिन बाद 14 अक्तूबर को सदन में 106 विधायकों का समर्थन साबित किया.

भाजपा और राज्यपाल के बीच टकराव की मुख्य वजह यह थी कि राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि वो 11 बाग़ी भाजपा विधायकों और पाँच सरकार विरोधी निर्दलीय विधायकों को अयोग्य घोषित ना करें.

इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में भाजपा के प्रवक्ता तरुण विजय ने कहा है कि "कर्नाटक में यह हमारी जीत हुई है. यहाँ दल-बदल क़ानून को शब्दशः और उसकी भावना को भी सही साबित किया गया है."

इस फ़ैसले के साथ ही गुजरात में अमित शाह को ज़मानत मिलने की ख़बर आने को तरूण विजय ने बीजेपी के लिए "दिवाली की शुभकामनाएँ" कहा.

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