चौथे चरण में नीतीश की लोकप्रियता की परीक्षा

पिछले चुनाव में इन सीटों पर नीतीश कुमार को भारी सर्मथन मिला था

बिहार विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में सोमवार को जिन 42 सीटें के लिए मतदान होने जा रहा हैं वह मुख्य मंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता का एक कड़ा इम्तेहान है.

इसका कारण यह है कि 2005 के विधानसभा चुनावों में गंगा के इस तटीय क्षेत्र की 32 सीटें जनता दल (यू) और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के खाते में गई थीं.

पटना, भागलपुर, बेगूसराय, खगड़िया, बांका, जमुई, मुंगेर और लखीसराय ज़िलों में पड़ने वाले इन इलाकों ने पिछली बार खुलकर लालू प्रसाद यादव के विरोध में वोट डाले थे. टीकाकार मानते हैं कि 15 साल के लालू-राबड़ी शासन के अंत में इस क्षेत्र की अहम भूमिका रही थी.

चौथे चरण में करीब एक करोड़ मतदाता कई दिग्गजों के भाग्य का फ़ैसला करेंगे. इस चरण में 568 उम्मीदवार मैदान में हैं.

इनमें शामिल हैं भागलपुर से बीजेपी के तीन बार विधायक रहे और वर्तमान सरकार में मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, पटना साहिब से नंद किशोर यादव, बांका से विधायक और नीतीश सरकार में पशुपालन और मत्स्य विभाग के मंत्री राम नारायण मंडल.

साथ ही कहलगांव से पांच बार के कांग्रेस विधायक और मंत्री भी रह चुके, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह और झाझा से जेडी (यू) के विधायक और मंत्री दामोदर राव के साख भी दांव पर है.

गठबंधन और उम्मीदवार

इस चरण की 42 सीटों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंदन (एनडीए) की तरफ़ से जेडी (यू) ने 25 उम्मीदवार खड़े किए हैं और बीजेपी 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

वहीं लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) गठबंधन ने भी पिछले चुनाव में जीती गई सीटों को आधार बनाते हुए उम्मीदवार खड़े किए हैं. राजद के 26 और लोजपा के 16 उम्मीदवार मैदान में हैं.

बहुजन समाज पार्टी ने 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं.

बेगूसराय के इलाक़े में प्रभाव रखने वाले वाम दल - सीपीआई, सीपीआई (एमएल) और सीपीएम संयुक्त तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. सीपीआई (एम एल) 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि वामपंथी दलों ने 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं.

विकास पर दावे और आरोप

चौथे चरण के चुनाव प्रचार में बिहार में विकास और कानून व्यवस्था में सुधार का मुद्दा छाया रहा. राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी लगभग सभी सभाओं में पाँच साल में किए गए राज्य के विकास के नाम पर वोट माँगा है.

तीस अक्तूबर को पटना जिले की फतुहा विधानसभा सीट पर जेडी (यू) उम्मीदवार अजय सिंह के लिए चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा, "बिहार की जनता ने पाँच साल तक एनडीए की सरकार को शासन का मौका दिया. इन पांच वर्षों में राज्य की सड़कों में अभूतपूर्व सुधार हुआ है. पहले लोग अपराधियों के डर से शाम छह बजे के बाद घर से बाहर निकलने में डरते थे. लोग बेख़ौफ़ होकर किसी भी समय घर से बाहर निकल सकते हैं. जितने भी अपराधी तत्व थे वो सब आज जेल के अंदर हैं. अब हमें पांच साल और सेवा का मौका दीजिए हम बिहार की तस्वीर पूरी तरह बदल देंगे."

लेकिन विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार के विकास के नारे को खारिज किया.

लालू ने 27 अक्टूबर को बेगूसराय की साहबपुर कमाल सीट पर अपने उम्मीदवार नारायण यादव का प्रचार करते हुए कहा, "पांच साल में नीतीश कुमार ने विकास का सिर्फ़ नारा ही लगाया है, जमीन पर विकास कहीं नज़र नहीं आता. राज्य की ग़रीब जनता का दुखदर्द सुनने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा है. जिस सड़क की तस्वीर दिखा कर नीतीश राज्य के विकास का दावा कर रहे हैं उसमें भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है."

वहीं कांग्रेस ने भी विकास के नीतीश कुमार के नारे की अपने चुनाव प्रचार में जम कर आलोचना की है.

पार्टी के स्टार प्रचारक राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर को कहलगांव में पार्टी नेता सदानंद सिंह का प्रचार करते हुए कहा, "नीतीश जी कह रहे हैं पांच साल में बिहार का विकास कर दिया है, पूरे राज्य की तस्वीर बदल दी है. लेकिन हक़ीक़त ये है कि बिहार नहीं चमचमा रहा, बल्कि बिहारी लोग ज़रूर चमक रहे हैं देश के दूसरे हिस्सों में जाकर. अगर बिहार में इतना विकास हुआ होता तो यहाँ के लोग रोज़गार के लिए राज्य के बाहर क्यों जाते."

चौथे चरण के प्रचार के दौरान कई नेताओं ने ऐसी भाषा का भी प्रयोग किया जिसे मर्यादा के अनुकूल नहीं कहा जा सकता. शुरुआत हुई जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव से उन्होंने फतुहा राहुल गांधी के बारे में टिप्पणी की और उनके खिलाफ मुज़फ़्फ़रपुर में मामला भी दर्ज कराया गया.

वहीं आरजेडी नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्ट है. इस बयान की भी कड़ी आलोचना हुई है.

संसदीय उपचुनाव

चौथे चरण में ही बांका संसदीय सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. यहां से निर्दलीय सांसद दिग्विजय सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई सीट पर दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़ी हैं.

एनडीए, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पुतुल सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है और उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है.

पुतुल सिंह का मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार जय प्रकाश नारायण यादव से है जो पिछले लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह से हार गए थे.

संबंधित समाचार