'शांति योजना' पर सकारात्मक रुख़

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर स्थित चरमपंथी संगठनों के समूह यूनाइटेड जिहाद काउंसिल का कहना है कि उन्हें इस बारे की जानकारी नहीं कि किसी चरमपंथी संगठन ने वार्ताकारों को शांति योजना सौंपने की बात कही है.

हालाँकि बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के प्रवक्ता सदाक़त हुसैन ने कहा कि जिन्होंने भी बात की होगी, ठीक ही होगी.

Image caption दिलीप पडगांवर ने कश्मीर जाकर कई गुटों से मुलाक़ात की थी

दरअसल भारत सरकार के ज़रिए नियुक्त वार्ताकारों के दल का नेतृत्व कर रहे दिलीप पडगांवकर ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर के चरमपंथियों ने 'शांति योजना' पेश करने की इच्छा जाहिर की है.

दिलीप पडगांवकर ने एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा कि जेल में चरमपंथियों से मुलाक़ात के दौरान चरमपंथी संगठन के प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे एक चरमपंथी ने कहा कि वे वार्ताकारों को एक शांति योजना पेश करना चाहते हैं.

इस पर यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के प्रवक्ता सदाक़त हुसैन ने कहा, "जेलों में जितने भी लोग बंद हैं चाहे उनका सीधा ताल्लुक चरमपंथ से हो या नहीं वे सारे लोग आज़ादी चाहते हैं. इसलिए उन सबका ताल्लुक़ हमारे साथ है, हम उनके हैं और वे हमारे हैं. उन्होंने जो बातचीत की हैं हमसे पूछकर नहीं की है लेकिन हमें पूरा यक़ीन हैं कि उन्होंने सही बात की होगी. ये ज़रूरी नहीं कि वो पहले हमसे पूछें कि वो बात करे या नहीं. पडगावंकर एक वार्ताकार हैं और वो किसी भी कश्मीरी से बात कर सकते हैं."

मजबूरी

सदाकत हुसैन ने कहा कि वे शांति पसंद लोग हैं लेकिन उन्हें बंदूक उठाने पर मजबूर किया गया है.

उन्होंने कहा कि भारत अगर सिर्फ़ ये मान ले कि कश्मीर एक विवादित मुद्दा है तो हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं.

दिलीप पडगांवकर ने चरपमंथियों की ओर से शांति योजना की पेशकश को एक महत्वपूर्ण क़दम माना है.

उन्होंने कहा, "जब हमने पहली बार हमने चरमपंथियों से जेल में मुलाक़ात की तो उन्होंने पूछा कि क्या आप एक बार फिर आएंगे? हम आपसे बात करना चाहते हैं लिहाज़ा, हम दूसरी बार गए."

दिलीप पडगांवकर ने बताया कि जब हम दूसरी बार मिलने गए तो डेढ़ घंटे तक चली मुलाक़ात के दौरान यह आश्चर्यजनक बात हुई कि उन संगठनों में से एक के प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे एक चरमपंथी ने हमसे कहा कि वे हमें शांति योजना सौंपना चाहते हैं.

पडगांवकर ने जवाब में कहा कि हम आपकी बात सुनने आए हैं. जब कभी आप अपने नज़रिए के साथ तैयार हों तो हमें बताएं, फिर हम उस पर गौर करेंगे. पडगांवकर के अनुसार ये एक महत्वपूर्ण क़दम हैं क्योंकि इससे संदेश मिलता है कि हमें सभी लोगों से बातचीत करने की जरूरत है.

उन्होंने किन चरमपंथियों से मुलाक़ात की या उनका किस संगठन से संबंध है अभी इसकी जानकारी नहीं हैं.

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