आंध्र प्रदेश स्थापना दिवस पर विरोध

तेलंगाना
Image caption तेलंगाना समर्थकों ने मुख्यमंत्री के निवास स्थान के पास विरोध प्रदर्शन किए

आंध्र प्रदेश राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को पृथक तेलंगाना सूबे के समर्थकों ने ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किए और सरकारी समारोहों में बाधाएँ उत्पन्न की.

आंध्र प्रदेश राज्य की स्थापना 1 नवंबर 1956 को तेलंगाना और आंध्र प्रांतों का विलय करके की गई थी.

हालाँकि पृथक तेलंगाना का आंदोलन पिछले 50 सालों से चल रहा है लेकिन स्थापना दिवस के मौक़े पर विरोध कुछ ज़्यादा ही व्यापक था.

अलग राज्य के समर्थक संगठनों ने पहले से ही आंध्र प्रदेश स्थापना दिवस को काले दिवस के रूप में मनाने और सरकारी समारोह का बहिष्कार करने का ऐलान किया था.

तेलंगाना समर्थकों के हाल के प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे और रैपिड एक्शन फ़ोर्स को भी तैनात किया गया था.

तेलंगाना समर्थक छात्रों ने मुख्यमंत्री के रोसैया के क़ाफ़िले को रोकने की कोशिश की.

कुछ लोगों ने मंत्री गीता रेड्डी के निवास स्थान के पास पथराव किया और उनके चित्र जलाए.

उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों की संयुक्त कार्य समिति ने काला झंडा दिखाकर अपना विरोध प्रकट किया.

पुलिस ने हैदराबाद में 200 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया है.

सरकारी समारोह

Image caption पुलिस ने राज्य भर में सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया है

स्थापना दिवस पर मुख्य सरकारी समारोह हैदराबाद के एनटीआर स्टेडियम में भारी सुरक्षा प्रबंधों के बीच संपन्न हुआ.

पुलिस ने स्टेडियम जाने वाले तमाम रास्तों को सील कर दिया था.

तेलंगाना क्षेत्र में भी लोगों ने जगह-जगह सरकारी दफ़्तरों पर काले झंडे लगाए और आंध्र प्रदेश के नक्शे जलाए.

लोक गायक ग़दर ने कहा है कि आंध्र प्रदेश की स्थापना के लिए तेलंगाना की जनता के साथ धोखा किया गया और उन्हें एक बार फिर से ग़ुलाम बना दिया गया.

उधर तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता के चंद्रशेखर राव ने धमकी दी है कि अगर केंद्र सरकार 31 दिसंबर तक तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए क़दम नहीं उठाती है तो पूरा प्रांत हिंसा की आग की चपेट में आ जाएगा.

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