अधिकारी 'खोसला का घोंसला' देखें: अदालत

अनुपम खेर
Image caption अभिनेता अनुपम खेर ने खोसला का घोसला फ़िल्म में अहम भूमिका अदा की थी

राजस्थान में एक स्थानीय अदालत ने पुलिस और शहरी विकास अधिकारियों को हिंदी फ़िल्म 'खोसला का घोंसला' देखने की सलाह दी है.

अदालत को लगता है कि ऐसा करने से इन अधिकारियों में उन लोगों के प्रति संवेदना पैदा होगी जो तिनका तिनका राशि जोड़कर अपने सपनों का आशियाना बनाना चाहते है. मगर कोई बीच में आकर इन सपनों को चूर चूर कर जाता है.

जयपुर में फास्ट ट्रैक के अतिरिक्त डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश कुमार गुप्ता ने ये आदेश तब सुनाया जब मेघालय में शिलोंग की निवासी राजस्थान मूल की मंजूषा झुनझुनवाला ने अदालत में वाद दायर कर अपनी वेदना बयान की.

मंजूषा ने जयपुर में 1982 में एक रिहाइशी भूखंड ख़रीदा था. मगर पिछले साल उन्हें पता लगा कि किसी ने ये भूखंड किसी अनजान व्यक्ति को बेच दिया. इसने मंजूषा का अपना आशियाना बनाने का ख्वाब ज़मीदोंज कर दिया.

मंजूषा ने अदालत को बताया कि कैसे पुलिस, जयपुर विकास अधिकरण और दूसरे महकमों ने उसकी फ़रियाद को अनसुना कर दिया.

अदालत ने अपने आदेश में ये भी दर्ज किया है कि व्यवस्था के ऐसे ही सलूक से लोगों में नाराज़गी, मायूसी और असंतोष पैदा होता है जो नक्सलवाद जैसी समस्याओं का कारण बनता है.

इस क़ानूनी दावे में मंजूषा ने अदालत को बताया कि उसके भूखंड का क्रमांक बदल दिया गया और आकार भी छोटा कर दिया गया.

अदालत सख्त

इस वाद में मंजूषा ने उसके भूखंड के ख़रीदार के बारे में पुलिस को बताया तो उस नाम का कोई व्यक्ति बताए हुए पते पर नहीं मिला.

मगर पुलिस ने ये कह कर मदद से हाथ झटक लिया कि ये सिविल या दीवानी प्रकृति का मुक़दमा है, पुलिस इसमें कुछ नहीं कर सकती.

अदालत ने मंजूषा की पीड़ा पर कान धरा और अधिकारियों से कहा है कि मंजूषा को उस विवादित भूखंड के उपयोग से नहीं रोका जाए. अदालत ने ये भी कहा कि किसी को इसमें बाधा नहीं पहुँचाने दे.

मानवाधिकारों पर काम करने वाले वकील एके जैन ने बीबीसी से कहा,''ये आदेश व्यवस्था की निर्ममता पर एक तल्ख़ लेकिन सही टिप्पणी है.'' अदालत ने कहा कि इन महकमों के अधिकारियों और कर्मचारियों को ये फ़िल्म देखनी चाहिए ताकि उन्हें जनता की ऐसी समस्याओ के प्रति संवेदनशील बनाने में मदद मिले.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि अधिकारियों को अनुपम खेर की इस फ़िल्म को देखने का वक्त मिलेगा या नहीं.

ये फ़िल्म 'खोसला का घोंसला' भारत के ऐसे ही लोगों की कहानी है जो अपनी सारी जमा पूंजी जमीन के उस टुकड़े पर क़ुर्बान कर देते है जहाँ वो अपने ख्वाबों की खूबसूरत इमारत खड़ी करना चाहते हैं.

मगर जमीनों के कारोबारी उसे हड़प लेते है और खोसला का घोंसला बिखर जाता है.

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