शर्मिला के अनशन के दस वर्ष पूरे

  • 3 नवंबर 2010
Image caption शर्मिला अनशन खत्म करने को तैयार नहीं हैं

इरोम शर्मिला चानू पिछले दस वर्षों से अनशन पर हैं, वे अनशन उसी हालत में तोड़ने को तैयार हैं जब भारत सरकार विवादास्पद आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल एक्ट (एएफ़एसपीए) को रद्द करे.

एएफ़एसपीए के तहत सेना और अर्धसैनिक बलों को असीमित अधिकार मिल जाता है जिसके दुरुपयोग के आरोप कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में लगते रहते हैं.

शर्मिला पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की रहने वाली हैं और बुधवार को उनके अनशन के दस वर्ष पूरे हो गए हैं.

शर्मिला के अनशन के दस वर्ष पूरे होने के मौक़े पर मणिपुर में ग़ैर सरकारी संगठनों ने कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया है.

यहाँ तक कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी केएस सुब्रह्मण्यम ने भी एक परिचर्चा में हिस्सा लिया और उन्होंने एएफ़एसपीए को हटाए जाने की माँग को सही ठहराया.

उन्होंने कहा, "अगर भारत को एक लोकतंत्र के रूप में दुनिया भर में सम्मान हासिल करना है तो इस तरह के बर्बर क़ानूनों का अंत ज़रूरी है."

नवंबर 2000 से ही शर्मिला को नाक में ट्यूब लगाकर जबरन खाना दिया जा रहा है जिसकी वजह से वे जीवित हैं.

संघर्ष का एक दशक

29 वर्ष की उम्र में अनशन शुरू करने वाली शर्मिला पिछले दस वर्षों में मणिपुर के लोगों के लिए जाना पहचाना नाम बन चुकी हैं.

सरकार का कहना है कि आतंकवाद और अलगाववाद से प्रभावित क्षेत्रों में शांति क़ायम रखने के लिए सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार दिया जाना ज़रूरी है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पिछले ही वर्ष मणिपुर सरकार की इस बात के लिए आलोचना की थी कि 111 लोगों के रहस्यमय ढंग से लापता होने के बारे में उसे जानकारी नहीं दी गई.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन लोगों को उनके घर से उठाकर मार डाला गया और उनकी लाश ग़ायब कर दी गई.

शर्मिला के भाई बताते हैं कि मालोम इलाक़े में 10 नौजवानों के इसी तरह 'मार डाले जाने' के बाद उन्होंने अनशन शुरू किया था जो अब तक चल रहा है.

इरोम सिंहजीत कहते हैं, "हत्याएँ 2 नवंबर को हुईं, गुरुवार का दिन था, शर्मिला बचपन से ही गुरुवार के दिन उपवास रखती थी, उस दिन भी उसका उपवास था. उस दिन के बाद से उसने कभी खाना नहीं खाया."

तीन दिन बाद पुलिस ने शर्मिला को आत्महत्या का प्रयास करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया और उसके बाद से उन्हें जबरन रबर ट्यूब के ज़रिए तरल खुराक दी जा रही है.

शर्मिला की निगरानी करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि लगातार दस वर्ष तक खाना न खाने की वजह से उनकी हड्डियाँ बहुत कमज़ोर हो गई हैं और कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ आ रही हैं.