आज़म ख़ान का निष्कासन रद्द

मोहम्मद आज़म ख़ान और मुलायम सिंह यादव
Image caption एक ज़माने में आज़म ख़ान मुलायम सिंह यादव के क़रीबी माने जाते थे.

समाजवादी पार्टी ने बुधवार को अपने बाग़ी नेता मोहम्मद आज़म ख़ान का निष्कासन रद्द कर दिया है. लेकिन मोहम्मद आज़म ख़ान ने सोच समझकर बाद में फैसला लेने की बात कही है.

पार्टी के माहसचिव राम गोपाल यादव ने एक दिल्ली से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके मोहम्मद आज़म ख़ान से पहले की तरह पार्टी को मज़बूत करने की बात कही है.

मोहम्मद आज़म ख़ान को पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान मई 2007 में छह साल के लिए समाजवादी पार्टी से निष्कासित किया गया था.

आज़म ख़ान ने अपने गृह नगर रामपुर से पार्टी की प्रत्याशी जयाप्रदा का खुलकर विरोध किया था. उन्होंने लोक सभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से तालमेल का भी विरोध किया था.

उस समय पार्टी में अमर सिंह की तूती बोलती थी और आज़म ख़ान की अमर सिंह से भी अनबन हो गई थी.

उस समय कुल मिलाकर ऐसी स्थिति बन गई कि पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को आज़म ख़ान को छह साल के लिए पार्टी से निकालना पड़ा था.

कल्याण सिंह का साथ और आज़म ख़ान का निष्कासन दो ऐसे कारण थे, जिससे मुस्लिम समुदाय में समाजवादी पार्टी की लोकप्रियता घटी. माना जाता है कि इसीलिए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को काफ़ी झटका लगा.

जनाधार में सेंध

Image caption आज़म ख़ान ने अभी वापस लौटने के बारे में अंतिम फ़ैसला नहीं किया है.

बाद में अमर सिंह, जयाप्रदा और कल्याण सिंह भी मुलायम सिंह का साथ छोड़ गए.

कहा जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय में खोया जनाधार वापस हासिल करने के लिए मुलायम ने आज़म ख़ान को वापस लाने का मन बनाया.

इसका रास्ता बनाने के लिए मुलायम सिंह यादव ने कल्याण का साथ लेने के लिए मुसलामानों से माफ़ी मांगी.

हाल ही में कुछ पत्रकारों से बातचीत में मुलायम सिंह यादव ने माना कि कुछ लोगों के दबाव में आज़म ख़ान को पार्टी से निकालना एक गलत निर्णय था , जिसका उन्हें अफ़सोस है.

मुलायम सिंह ने यह भी कहा कि आज़म ख़ान समाजवादी पार्टी के संस्थापकों में से हैं, और उन्हें पार्टी में वापस आ जाना चाहिए.

आज़म ख़ान का विरोध

आज़म ख़ान अलीगढ़ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नेता और बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति के संयोजक रह चुके हैं और मुस्लिम समुदाय में उनकी पैठ मानी जाती थी. इसलिए समाजवादी पार्टी में उनका दबदबा होता था.

लेकिन अंदर ही अंदर समाजवादी पार्टी के कई मुस्लिम नेता आज़म ख़ान की पार्टी में वापसी का विरोध कर रहे थे.

इन मुस्लिम नेताओं को आज़म ख़ान के व्यवहार से शिकायत रहती थी.

लेकिन समझा जाता है कि मुलायम सिंह यादव ने डेढ़ साल बाद उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव को देखते हुए आज़म को पार्टी में वापस लाना ज़रूरी समझा.

मगर आज़म ख़ान ने कहा है कि उन्होंने अपनी मश्वराती कमेटी के पांच सदस्यों की एक समिति बनाई है जो दस दिनों में रिपोर्ट देगी. यह समिति मुस्लिम समुदाय की समस्याओं पर एक चार्टर या घोषणा पत्र बना रही है.

आज़म ख़ान का कहना है कि इस चार्टर के आधार पर बातचीत के बाद ही वह समाजवादी पार्टी में वापसी का निर्णय करेंगे.

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