दस अरब डॉलर के बीस सौदे

  • 6 नवंबर 2010
बराको ओबामा

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और दोनों देशों के बीच व्यापार पाँच साल में दुगना करने का लक्ष्य है.

ओबामा भारत-अमरीका व्यापार जगत के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

उनका कहना था कि वर्ष 2010 में अमरीका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों से परस्पर लाभ हुआ है. यह दोनों के ही हित में रहा.

राष्ट्रपति का कहना था कि दोनों देशों के बीच व्यापार पर्याप्त नहीं है और अभी बहुत कुछ होने की गुंजाइश है.

उन्होंने कहा कि व्यापार के क्षेत्र में भारत अमरीका का 12वें नंबर का भागीदार है जबकि उसे बहुत आगे होना चाहिए.

उन्होंने दोनों देशों के बीच दस अरब डॉलर की लागत से बीस समझौतों का ऐलान किया.

अपनी भारत यात्रा के पहले दिन मुंबई पहुँचने के बाद वह अपनी पत्नी मिशेल ओबामा के साथ इन हमलों का शिकार हुए ताज होटल पहुँचे और प्रभावित लोगों और मृतकों के परिवारजनों से मिले.

उस मौक़े पर उन्होंने कहा, "26 नवंबर के हमले के पीछे जिन लोगों का हाथ था उनका मक़सद था भारत और अमरीका के बीच दरार पैदा करना. लेकिन दोनों देश एकजुट हैं".

ओबामा की भारत यात्रा पर लाइव टेक्स्ट

उनका कहना था, "भारत में होना मेरे लिए असाधारण सम्मान है".

उन्होंने कहा, "26 नवंबर के मुंबई हमलों का मक़सद लोगों का मनोबल गिराना था लेकिन हमलावर विफल रहे. चाहे हवाएं कितनी ही तेज़ क्यों न हों आंधियां ही क्यों न चल रही हों हम कभी भी आज़ादी की मशाल को बुझने नहीं देंगे".

उन्होंने अपने भाषण में ताज होटल के प्रबंधक कुलदीप कांग की सराहना की जिन्होंने इन हमलों में अपनी पत्नी और बच्चों को खोया लेकिन वह अन्य लोगों को बचाने में लगे रहे.

ओबामा के सामने हैं कई सवाल

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "हम कभी भी 26/11 हमलों की तस्वीरें नहीं भूल सकते. नवंबर 2008 में ताज से निकलते हुए शोले आसमान को चार दिनों तक रौशन करते रहे. जिन्होंने मुंबई पर हमला किया वो इस शहर और भारत का मनोबल तोड़ना चाहते थे, लेकिन वे विफल रहे क्योंकि दूसरे ही दिन मुंबई के लोग अपने अपने काम पर वापस आए".

ओबामा ने ताज होटल में रखी स्मारिका पर हस्ताक्षर किए और ताज को भारतीय जनता की ताक़त का प्रतीक बताया.

उसके बाद वह मणि भवन गए जहाँ महात्मा गांधी ने कई साल गुज़ारे थे.

नई आधारभूमि

इस बीच अपनी यात्रा से पहले अमरीकी समाचार पत्र 'न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए अपने एक लेख में ओबामा ने कहा कि अमरीका को अब अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए नई आधारभूमि तैयार करनी है.

उन्होंने कहा, ''अमरीकियों के पास इस बात का हुनर है कि वो ऐसे उत्पादों की खोज करें और उन्हें विकसित करें जो दुनिया भर में बिकते हैं. ये हमारे अर्थतंत्र की बुनियाद है, जो नई आधारभूमि का हिस्सा बनेगी.''

क्या सौगात लाए हैं ओबामा?

ओबामा ने कहा कि एशिया की उनकी यात्रा का मकसद इन देशों में अमरीका के निर्यात को बढ़ावा देना है.

उन्होंने कहा, ''हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती ये देखना है कि अमरीका सभी तरह की नौकरियों और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा के लिए भविष्य में खुद को तैयार रख सके. यह एक मुश्किल काम है और संभव है कि आसान रास्ता अपनाने के लिए हम दूसरे देशों से मुकाबला करने कि बजाय अपने बाज़ारों को सीमित कर लें. लेकिन आज के विश्व में यह विकास का रास्ता नहीं. ''

''हमें अपनी सेवाएँ और उत्पाद दुनिया भर के बाज़ारों के लिए तैयार करने होंगे. खासतौर पर एशियाई बाज़ार. इस तरह हम एक मज़बूत अर्थव्यस्था तैयार करेंगे जिसकी नींव बेहद मज़बूत होगी.''

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