सिद्धार्थ शंकर रे का निधन

सिद्धार्थ शंकर रे
Image caption सिद्धार्थ शंकर रे दिवंगत कम्युनिस्ट नेता ज्योति बसु के अच्छे मित्रों में से एक थे

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे का लंबी बीमारी के बाद 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

वे गत मार्च से डायलिसिस पर थे. शनिवार की शाम अपने दक्षिण कोलकाता स्थित निवास में उन्होंने अंतिम साँसें लीं.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और राजदूत के पद भी संभाले.

बांग्लादेश की आज़ादी के संघर्ष, पश्चिम बंगाल में नक्सली आंदोलन के निबटने, आपात काल लगाने के इंदिरा गांधी के निर्णयों में उनका बड़ा योगदान माना जाता है.

चर्चित नेता

वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के पोते थे.

कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए और फिर बैरिस्टर होकर लौटे.

उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत बिधान चंद्र रॉय के मंत्रिमंडल के सदस्य के रुप में शुरु की. एक दशक बाद वे केंद्रीय राजनीति का हिस्सा बन गए और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नज़दीकी सलाहकारों में से एक हो गए.

वे अपने समय के सबसे चर्चित राजनीतिज्ञों में से एक थे.

बांग्लादेश के मुक्ति संघर्ष में वे इंदिरा गांधी के साथ काम करते रहे और संघर्ष करने वालों और भारत सरकार के बीच वे प्रमुख संपर्क सूत्र थे.

वे 1962 से 1971 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहे और 1972 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री के रुप में नक्सली आंदोलन से निबटने के उनके तौर तरीक़ों पर बहुत विवाद हुआ. उन पर आंदोलन को कुचलने के लिए प्रताड़ना और हत्याओं के आरोप लगे लेकिन कभी कुछ साबित न हो सका.

आपात काल को भारतीय लोकतंत्र का काला पन्ना कहा जाता है. माना जाता है कि आपात काल लगाने की सलाह इंदिरा गांधी को सिद्धार्थ शंकर रे ने ही दी थी.

अपनी इस सलाह को उचित ठहराते हुए पिछले साल ही उन्होंने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उस समय देश के कई हिस्सों में अफ़रातफ़री का माहौल था और सख़्त क़दम उठाना आवश्यक था.

वर्ष 1977 में वे राज्य का चुनाव हार गए और सक्रिय राजनीति से अलग हो गए. 1986 में उन्हें पंजाब का राज्यपाल बनाया गया और 1992 से 96 के बीच वे अमरीका में भारत के राजदूत रहे.

रविवार को उनका अंतिम संस्कार होगा. वे अपनी पीछे पत्नी माया रे को छोड़ गए हैं.

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