भारतीय मीडिया में छाए बराक ओबामा

  • 7 नवंबर 2010
भारतीय अख़बार

सभी भारतीय अख़बार अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा की खबरों से भरे पड़े हैं लेकिन उनके शीर्षकों में तल्ख़ी भी है कि यात्रा के पहले दिन ओबामा का सारा ध्यान अमरीका और वहाँ की नौकरियों पर रहा.

अमर उजाला ने बराक ओबामा और उनकी पत्नी की तस्वीर के साथ शीर्षक दिया है- सौदागर ओबामा.

अख़बार ने 10 और 54 जैसे आंकड़े देकर ये बताने की कोशिश की है कि दस अरब डॉलर का व्यापारिक समझौता हुआ है और 54 हजार नौकरियों की राह खुलेगी.

अख़बार का कहना है कि भारत अमरीका के साथ व्यापार सहयोग में 12वें स्थान पर पहुंच गया है. उसने व्यापार सहयोग में और 20 से अधिक क़रार किए गए हैं.

अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- 'जॉब्स, ट्रेड फॉर यूएस डोमिनेट डे वन' यानि पहले दिन नौकरियाँ और कारोबार हावी रहा.

इंडियन एक्सप्रेस ने अन्य ख़बरों के अलावा तस्वीर के साथ ये ख़बर भी छापी है कि 'रंग दे बसंती' पर खूब नाचीं मिशेल आबामा.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया का हेडिंग है- भारतीय पिच पर अमरीका. अख़बार लिखता है कि राष्ट्रपति ओबामा ने कुछ दिया तो कुछ लिया भी.

अख़बार लिखता है कि उन्होंने निर्यात नियंत्रण पर कुछ रियायत दी है और बदले में अरबों के सौदे पर दस्तख़त किए हैं.

दैनिक हिंदुस्तान ने इस ख़बर को सुर्खी दी है- क़रार यहां, नौकरी वहां.

अख़बार ने तथ्य देते हुए ये साफ़ करने की कोशिश की है कि जितने भी क़रार हुए हैं उसमें अमरीका का हित ज्यादा है.

जैसे भारत में दर्जनों बोइंग विमान बेचे जाएंगे, जीई सैकड़ों इलेक्ट्रिक इंजन बेचेगी.

दैनिक जागरण की सुर्खी है- आर्थिक मुद्दों पर खोली मुट्ठी लेकिन रणनीतिक मसलों पर खामोश रहे अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा.

अख़बार ने व्यापारिक समझौतों की ख़बर के साथ ओबामा के एजेंडे की भी बात की है और बताया है कि ओबामा इस उम्मीद से भारत आए हैं कि भारत कृषि, रिटेल और संचार क्षेत्र में ज्यादा उदारवादी नीति अपनाएगा.

साथ ही उन्होंने ये संकेत भी दिया है कि आउटसोर्सिंग के मसले पर नरमी नहीं बरती जाएगी.

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