तारीफ़ ही तारीफ़

ओबामा और मनमोहन सिंह
Image caption ओबामा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बहुत तारीफ़ की है

भारत की यात्रा पर आए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भाषणों या बयानों पर नज़र डालें तो लगता है कि दुनिया बदल सी गई है....कहने का मतलब ये है कि अमरीका जैसा सुपर पावर अगर भारत की तारीफ़ में ऐसे पुल बांधे तो लगता है कि कुछ बात तो ज़रुर है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत में तीन दिन रहे जो उन्हीं के शब्दों में अमरीका से बाहर किसी भी देश की उनकी सबसे लंबी यात्रा है. अपनी पूरी यात्रा में उन्होंने मुंबई में युवाओं से बात की और दिल्ली में पत्रकारों से मुखातिब हुए. बातें उन्होंने कई कहीं लेकिन उसमें एक बात जो बार बार कह रहे थे वो था भारत का एक बड़ी शक्ति के रुप में स्थापित हो जाना.

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राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद दिया गया उनका बयान कुछ यूं था, ‘‘भारत और अमरीका की साझेदारी 21 वीं सदी की एक महत्वपूर्ण बात होगी. भारत अब उदीयमान राष्ट्र नहीं रहा एक वैश्विक शक्ति बन चुका है तो अमरीका उसके साथ मिलकर काम करेगा. जिन नियमों को हम मानते हैं उनके लिए हम भारत के साथ मिलकर काम करेंगे.’’

राष्ट्रपति भवन में स्वागत के दौरान ये कहने के बाद ओबामा ने पत्रकारों के समक्ष संयुक्त वार्ता की शुरुआत में ही कहा कि भारत का प्रभाव दुनिया भर में बढ़ता ही जा रहा है.

उनका कहना था, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि जैसे जैसे भारत का प्रभाव बढ़ रहा है वैसे वैसे अमरीका के साथ कई मुद्दों पर मिल कर काम करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं.’’

भारतीय रक्षा मामलों के जाने माने अमरीकी विशेषज्ञ स्टीफन कोहेन ने 2001 में भारत को emerging power या उदीयमान राष्ट्र का दर्जा़ दिया था.नौ वर्ष बाद राष्ट्रपति ओबामा ने एक ही झटके में घोषणा कर दी कि अब भारत उदीयमान राष्ट्र नहीं रहा बल्कि विश्व की बड़ी शक्ति के रुप में स्थापित हो चुका है. मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्रांगण में ओबामा ने जो कहा उससे सुखद बयान भारत के लिए शायद और कुछ नहीं हो सकता था.

ओबामा का कहना था, ‘‘कुछ लोग मानते हैं कि भारत अभी भी उदीयमान राष्ट्र है लेकिन अमरीका पूरे विश्वास के साथ मानता है कि भारत उदीयमान राष्ट्र नहीं रहा बल्कि वैश्विक शक्ति बन चुका है. वो अब एशिया और पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है. एक मज़बूत भारत अमरीका के हित में है.’’

भारत में नौकरियां मांगने के लिए आए ओबामा को नौकरियां मिलीं तो उन्होंने बदले में भारत की तारीफ़ की साथ ही तारीफ़ की भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भी और बार बार कहा कि मनमोहन सिंह से उनकी दोस्ती पुरानी है और वो अत्यंत पढ़े लिखे अनुभवी और बुद्धिमान नेता हैं.

ओबामा को जहां कहीं भी मौका मिला उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी अच्छे शब्द कहे. प्रधानमंत्री के घर पर रात्रिभोज के लिए ओबामा समय से पहले पहुंचे और बहुत देर तक दोनों नेताओं ने एकांत में एक दूसरे से बातचीत की.

ओबामा बार बार यह कहते हुए सुने गए कि मनमोहन सिंह उनके दोस्त हैं.

इस दौरे में ओबामा का सारा ज़ोर इस बात पर रहा कि अगली सदी अगर किसी की होगी तो वो भारत और अमरीका की ही होगी.

उनका कहना था, ‘‘21वीं सदी में भारत और अमरीका की साझेदारी को नकारा ही नहीं जा सकता है. दो बड़ी शक्तियां, दो बड़े लोकतंत्र की दोस्ती अवश्यंभावी है और यही 21 वीं सदी की दिशा तय करेगी. दोनों देशों के हित एक जैसे हैं.’’

राष्ट्रपति ओबामा ने तो भारत को बड़ी शक्ति मान लिया है लेकिन क्या अमरीका की जनता और बाकी दुनिया ओबामा की राय से इत्तेफ़ाक़ रखेगी ये एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब समय ही दे सकता है.

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