चव्हाण से चुनौतियों के बावजूद उम्मीदें

पृथ्वीराज चव्हाण

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर पृथ्वीराज चव्हाण का नाम तय होने के बाद लोगों को उनसे बहुत उम्मीदे हैं. कारण हैं उनकी साफ़-सुथरी छवि और दिल्ली में उनका अनुभव.

मध्य प्रदेश के इंदौर में पैदा हुए 64-वर्षीय पृथ्वीराज चव्हाण की पढ़ाई ख्यातिप्राप्त बिट्स पिलानी के अलावा कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में हुई. वो इंजीनियर हैं. क्रिकेट, टेनिस, बैडमिंटन और तैराकी के शौकीन पृथ्वीराज चव्हाण बेहद मुश्किल समय में महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं.

आख़िरकार प्रधानमंत्री दफ़्तर में काम करना और राज्य के स्थानीय नेताओं को साथ लेकर चलने में बहुत फ़र्क है. उनकी माँ का नाम प्रेमलाबाई और पिता का नाम डीआर चव्हाण हैं. वर्ष 1991 में वो पहली बार संसद के सदस्य बने. उन्हें गाँधी परिवार का नज़दीकी माना जाता है.

लेकिन एक के बाद एक मुख्यमंत्रियों के बदलने के बाद पृथ्वीराज चव्हाण का राजनीतिक पटल पर आना लोगों में ढेर सारी उम्मीदें पैदा करता है.क्या ये उम्मीदें पूरी होंगी?

उम्मीदें

अख़बार लोकसत्ता के संपादक और राजनीतिक टीकाकार कुमार केतकर मानते हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की जानकारी पृथ्वीराज चव्हाण के बहुत काम आएगी.

केतकर कहते हैं, "बहुत सालों बाद महाराष्ट्र को इस तरह का मुख्यमंत्री मिल रहा है जो आज के विश्वव्यापी प्रचलन और राष्ट्रीय मुद्दों के अलावा महाराष्ट्र के मुद्दों को भी समझता है. अभी तक जो मुख्यमंत्री थे वो महाराष्ट्र में पैदा हुए और उनकी राजनीति भी यहीं रही, लेकिन पृथ्वीराज चव्हाण का वक्त प्रधानमंत्री दफ़्तर में गुज़रा. उन्हें भारत-अमरीका परमाणु समझौते से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों की पूरी जानकारी है."

मराठी टीवी चैनल आईबीएन-लोकमत के संपादक निखिल वागले मानते हैं कि अगर कोई दूसरा मुख्यमंत्री होता तो लोगों की प्रतिक्रिया इतनी अच्छी नहीं होती, क्योंकि महाराष्ट्र कांग्रेस में साफ़-सुधरी छवि वाले नेता बहुत कम हैं.

लेकिन पृथ्वीराज चव्हाण की कमज़ोरी है उनकी राज्य मे अनुभव में कमी,राज्य में उनका कोई गुट नहीं होना,और राज्य के विवादास्पद मुद्दों की जानकारी नहीं होना जैसा कि स्थानीय राजनीतिज्ञों को होती है.

लेकिन कुमार केतकर आशान्वित हैं. वो कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता है कि ये कमज़ोरी है. एक तरीके से देखो तो किसी भी गुट का नहीं होना उनके लिए अच्छा होगा. जिस व्यक्ति का खुद का निजी स्वार्थ नहीं है, उसे गुटबाज़ी से डरने की ज़रूरत नहीं है.’

उधर निखिल वागले कहते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति पिछले 50 साल में बहुत गंदी बन गई है और ऐसे वक्त पृथ्वीराज से उम्मीदें बहुत हैं.

गठबंधन की चुनौतियां

शिवसेना सांसद और मराठी अख़बार महाराष्ट्र टाइम्स के संपादक भरतकुमार राउत कहते हैं, "उन्हें शून्य से नहीं, माइनस से शुरू करना है. उन्हें कई चुनौतियों का एक साथ सामना करना है."

राउत कहते हैं कि महाराष्ट्र के किसानों की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है साथ ही बिजली की अलग समस्या है.

इसके अलावा पृथ्वीराज चव्हाण के समक्ष चुनौती होगी राजनीतिक सहयोगी एनसीपी को साथ लेकर चलना. माना जाता है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से उनके संबंध अच्छे नहीं हैं.

Image caption चव्हाण केंद्र में संसदीय कार्यमंत्री रह चुके हैं. इससे उन्हें गठबंधन सरकार चलाने में सहायता मिलेगी.

निखिल वागले कहते हैं, ‘शरद पवार के साथ संबंधों की बात सच है, लेकिन महाराष्ट्र में अगर आप कांग्रेस के मुख्यमंत्री हैं तो एनसीपी विरोधी लाईन ही लेनी पड़ेगी. ये एक योग्यता जैसी हो गई है.’

उधर कुमार केतकर कहते हैं कि एनसीपी को साथ लेकर चलना चुनौती ज़रूर होगी, लेकिन वो अच्छी तरह इसका सामना कर पाएंगे.

केतकर कहते हैं, ‘दिल्ली में उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री का काम किया है. वहाँ एनसीपी के दो मंत्री हैं, प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार. तो इन लोगों से किस तरह से रिश्ता रखना चाहिए, वो अच्छी तरह से जानते हैं. उनका गंभीर व्यक्तित्व है और इसका फ़ायदा उनको ज़रूर होगा."

पृथ्वीराज चव्हाण के सामने एक और बड़ी चुनौती होगी शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी ताकतों को काबू में रखना.

विपक्ष

Image caption चव्हाण के सामने कई चुनौतियां हैं.

निखिल वागले कहते हैं कि देखने वाली बात होगी कि शिवसेना और मनसे की हिंसा और तोड़फोड़ की राजनीति से पृथ्वीराज चव्हाण कैसे निपटते हैं.

एक दिसंबर से महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है तो ये ज़ाहिर सी बात है कि विपक्ष पृथ्वीराज चव्हाण को घेरने की कोशिश करेगा. आज से ही उन्होंने अपनी आलोचना शुरू कर दी है हालांकि विपक्ष की विश्वसनीयता भी कम हुई है.

कुमार केतकर मानते हैं कि शिवसेना और मनसे, और शिवसेना और भाजपा में जिस तरह से झगड़े चल रहे हैं, नए मुख्यमंत्री के लिए अच्छा होगा कि वो शिवसेना और मनसे के फंदे में नहीं पड़े.

उधर निखिल वागले के अनुसार अगर चव्हाण नेता-बिल्डर-अपराधी के बीच सांठगाँठ को तोड़ने में कामयाब होते हैं तो लोगों को राहत होगी.

उधर राज्य में विभिन्न पार्टियों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी का कहना है कि उनके सामने चुनौतियाँ ढेरों हैं.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रवक्ता वागेश सारस्वत ने कहा है कि उनकी पार्टी नए मुख्यमंत्री को पूर्ण समर्थन देगी और उनसे उम्मीद है कि वो राज्य का विकास करेंगे.

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