सशर्त बातचीत संभव: गणपति

  • 10 नवंबर 2010
नक्सली बंदूक के साथ
Image caption गणपति ने कहा है कि उनकी पार्टी सशर्त बातचीत के लिए तैयार है.

नक्सलवादी संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया माओवादी के प्रमुख नेता मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ़ गणपति ने अपनी लम्बी ख़ामोशी तोड़ते हुए कहा है की केंद्र सरकार और मओवादिओं के बीच बातचीत के लिए वातावरण अनुकूल नहीं है लेकिन वो कुछ शर्तों पर सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं.

गणपति ने जो शर्तें रखी हैं उन में सीपीआई (माओवादी) पार्टी पर से प्रतिबंध हटाना और उसे किसी भी दूसरे दल की तरह काम करने का लोकतान्त्रिक अधिकार देना, ऑपरेशन ग्रीन हंट रोकना, अर्ध-सैनिक बलों को वापस बुलाना और जेल में बंद माओवादी नेताओं को रिहा करना शामिल है.

उन्होंने कहा कि अतीत को देखते हुए किसी भी भूमिगत नेता के लिए सीधे बातचीत करना संभव नहीं है और इसलिए सरकार जेलों में बंद माओवादी नेताओं को रिहा करे ताकि वो वार्ता में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकें.

अनेक पत्रकारों के सवालों के जवाब में भेजे गए इस लम्बे वक्तव्य में गणपति ने कई विषयों पर अपनी राय रखी है.

उन्होंने अपनी पार्टी के एक मुख्य नेता आज़ाद की आंध्र प्रदेश में पुलिस के हाथों मृत्यु से लेकर, कश्मीर, अयोध्या, पश्चिम बंगाल के आगामी विधान सभा चुनाव और हथियारों की तस्करी जैसे कई विषयों पर अपने विचार प्रकट किये. उन्होंने ये आरोप दोहराया की केंद्र सरकार कभी भी मओवादिओं के साथ बातचीत के विषय में गंभीर और ईमानदार नहीं रही है.

'आज़ाद की मौत से धक्का'

उन्होंने कहा की आज़ाद ने आख़िरी समय तक यही कहा की माओवादी युद्ध-विराम के लिए तैयार है बशर्ते सरकार भी ऐसा ही करे, लेकिन केंद्र सरकार ने उल्टा एक साज़िश के तहत आज़ाद को मर डाला.

गणपति ने माना की आज़ाद की मौत संगठन के लिए एक बहुत बड़ा धक्का है. दरअसल गणपति एक गुप्त स्थान पर पत्रकारों से मिलने वाले थे लेकिन आज़ाद की मौत के बाद माओवादी नेताओं की सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे के मद्देनज़र इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया. कश्मीर पर उन्होंने कहा की उनकी पार्टी आज़ादी और स्वाधीनता के लिए कश्मीरी जनता की जायज़ लड़ाई का पूरा समर्थन करती है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस वक्तव्य पर की मओवादिओं को बंगलादेश,चीन और म्यांमार से हत्यार मिल रहे हैं, गणपति ने कहा की यह सत्तारुढ़ पक्ष की और से मओवादिओं को आतंकवादी और ग़द्दार बनाकर पेश करने की कोशिश है.

उन्होंने कहा की उन के लिए हथियारों का असल स्रोत सरकारी दलों के पास से छीने गए हथियार होते हैं.

गणपति ने माना की उन का संगठन देश और विदेश के बाज़ारों से भी हत्यार खरीदेगा जैसा की भारत सरकार अनेक देशों से युद्ध सामग्री और टेक्नोलॉजी खरीद रही है.

'तृणमूल हमारी दोस्त नहीं'

Image caption गणपति ने स्वीकार किया कि आज़ाद की मौत से उनके संगठन को धक्का पहुंचा है.

पश्चिमी बंगाल के आगामी विधान सभा चुनाव के बारे में उन्होंने कहा की वहां की जनता ने मार्क्सवादी कमुनिस्ट पार्टी को सबक सिखाने का फ़ैसला कर लिया है.

लेकिन इस का अर्थ यह नहीं है की ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने से सब कुछ बदल जायेगा. उन्होंने कहा की कुछ नहीं बदलेगा क्योंकि वो न तो ज़मींदारों की ज़मीन छीन कर गरीब किसानों को देंगी और न ही राज्य में स्वतंत्र चुनाव होंगे. अयोध्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला मुसलमान समुदाय के साथ नाइंसाफी है.

उन्होंने कहा की इस फ़ैसले को एक उदाहरण बना कर हर मस्जिद को एक विवादित स्थान बनाया जा सकता है और हर अल्पसंख्यक के धार्मिक स्थान को गिराया जा सकता है.

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