रामालिंगा राजू वापस जेल पहुंचे

रामलिंगा राजू
Image caption रामलिंगा राजू वापस जेल में पहुंच गए हैं

भारत के इतिहास में सबसे बड़े कॉर्पोरेट घोटाले 'सत्यम स्कैंडल' के मामले ने बुधवार को एक और मोड़ लिया जब सत्यम के संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष बी रामालिंगा राजू वापस जेल पहूंचा दिया गया.

क़रीब 7000 करोड़ रुपये का ये घोटाला जनवरी 2009 में सामने आया था. रामालिंगा राजू और इस मामले के पांच दुसरे अभियुक्तों ने मंगलवार को हैदराबाद की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

राजू को अब चंचलगुडा जेल भेज दिया गया है. रामालिंगा राजू को 18 अगस्त को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 20 लाख रुपये की ज़मानत पर इस आधार पर रिहा कर दिया था की उनका स्वस्थ ठीक नहीं है. लेकिन सीबीआई ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

सीबीआई ने अदालत से शिकायत की कि रिहा होने के बाद रामालिंगा राजू गवाहों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं और उन से मिल रहे है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन की ज़मानत रद्द कर दी.

कोशिश नाकाम

रामालिंगा राजू ने मंगलवार तक भी इस बात की कोशिश की कि उनकी जेल को वापसी कम से कम एक महिना टल जाये लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन की दूसरी याचिका भी मंगलवार को रद्द कर दी गई जिस के बाद उन्हें जेल लौट जाना पड़ा.

जिन दुसरे मुख्य अभियुक्तों ने आत्मसमर्पण किया है उन में रामालिंगा राजू के भाई और कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक राम राजू, वी. श्रीनिवास, वेंकटपति राजू और रामकृष्ण शामिल हैं. रामालिंगा राजू को एक ऐसे समय जेल लौटना पड़ा है जब की हैदराबाद की एक अदालत में इस घोटाले के मामले की सुनवाई रोज़ाना कर रही है.

रामालिंगा राजू को उस समय एक और झटका लगा जब की बीएनपी पारिबा बैंक के एक मैनेजर ने अदालत में कहा है की सत्यम ने जो फिक्स्ड डिपोज़िट सर्टिफिकेट होने का दावा किया है वे नकली हैं.

सत्यम घोटाला सामने आने के बाद भारत की यह चौथी बड़ी सॉफ़्टवेयर कम्पनी एक बड़े संकट में घिर गयी थी. बाद में उसे महिंद्रा और महिंद्रा ने ख़रीद लिया और अब ये कंपनी सत्यम महिंद्रा के नाम से काम कर रही है.

संबंधित समाचार