आख़िरी चरण के लिए भारी सुरक्षा

  • 11 नवंबर 2010
मतदान केंद्र पर सुरक्षा इंतज़ाम (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption इस बार हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय सुरक्षा बल के कर्मी तैनात रहेंगे

बिहार में मौजूदा चुनावी समर के अंतिम चरण की कथा आख़िरी दौर के मतदान वाले उन 26 विधानसभा क्षेत्रों में लिखी जाएगी, जो इससे पहले ख़ूनी नक्सल संघर्षों से लाल होते रहे हैं.

इस राज्य के सबसे ख़ास और अटूट लोक-आस्था से जुड़े महापर्व 'छठ' के एक हफ़्ते बाद 20 नवम्बर को,मतदान का यह अंतिम चरण दुखांत नहीं, सुखांत रहे, सब यही चाहते हैं.

लेकिन ऐसे शुभचिंतक 'सब' में नक्सली भी शामिल होंगे, इस पर यहाँ पुलिस-प्रशासन को शक है. तभी तो इस चरण के मतदान से संबंधित इलाक़ों, ख़ासकर गया, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर ज़िलों में प्रशासन की तरफ़ से सुरक्षा के 'अभूतपूर्व बंदोबस्त' का दावा किया जा रहा है.

राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बीबीसी को बताया कि इस आख़री दौर के मतदान से जुड़े सभी छह हज़ार 761 बूथों पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात रहेंगे. जबकि पिछले पांच चरणों में 70 या 80 फ़ीसदी बूथों पर ही केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती हुई थी.

नक्सली ख़तरा

उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रशासन की सलाह पर ही चुनाव आयोग ने इन 26 विधानसभा सीटों पर अंत में एक साथ मतदान कराने की व्यवस्था की और ये ज़रूरी भी था क्योंकि नक्सली ख़तरा इन क्षेत्रों में ज़्यादा है.

यही वो इलाक़ा है, जहाँ नक्सलियों ने दलेलचक-बघौरा, बारा और मियांपुर के तीनों बड़े-बड़े नरसंहारों के ज़रिए मध्य बिहार में अपना ख़ूनी दबदबा क़ायम किया. दो पूर्व सांसदों की हत्या यहीं की गई थी.

अपनी अलग 'जन अदालतें' लगाकर कथित दोषियों के हाथ-पाँव काटने या सरेआम उन पर डंडे बरसाने जैसा तालिबानी आतंक यहीं दिखता रहा है. यहाँ कुछ इलाक़ों को तो इन्होंने अपनी सामानांतर सरकार वाला मुक्त क्षेत्र (लिबरेटेड ज़ोन) घोषित कर रखा है.

संसदीय लोकतंत्र को 'ढकोसला और सर्वहारा विरोधी बुर्जुआ तंत्र' मानने वाले इन नक्सलियों ने पहले की तरह इस बार भी चुनाव बहिष्कार की अपील जारी की है. इस अपील का आम तौर पर बिहार के चुनाव में कभी कोई ख़ास असर नहीं देखा गया.

लेकिन ये ज़रूर हुआ कि जहाँ इन्हें मौक़ा मिला, वहाँ सड़क या रेलमार्ग पर तोड़-फोड़ या बारूदी सुरंग विस्फोट के ज़रिए ख़ास तौर पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया.

इस बार के चुनाव में अब तक नक्सलियों को मतदान के दौरान बड़ी हिंसक घटना करने का मौक़ा नहीं मिल पाया है. इसलिए आशंका व्यक्त की जा रही है कि जो इलाक़े झारखंड की सीमा से लगे हैं, वहाँ वो कोई वारदात करके झारखण्ड क्षेत्र में छिप जाने की कोशिश कर सकते हैं.

इसलिए चुनाव आयोग का निर्देश है कि आख़री दौर वाले शत-प्रतिशत मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बल ही तैनात रहें.

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