सीपीएम के 44 लोगों को उम्रकै़द

बंगाल में किसान
Image caption सभी किसान सीपीएम के मुख्य विरोधी दल त्रिणमूल कांग्रेस के समर्थक थे.

पश्चिम बंगाल के वीरभूम ज़िले में 11 किसानों की हत्या के जुर्म में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 44 कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है.

तक़रीबन 10 साल पहले, वर्ष 2000 में, वीरभूम के सचपुर गांव में सीपीएम कार्यकर्ताओं ने त्रिणमूल कांग्रेस समर्थक 11 किसानों को मौत के घाट उतार दिया था.

सत्र न्यायाधीश विश्वनाथ कोनार ने सीपीएम के 44 कार्यकर्ताओं को हत्या और दंगे का दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई.

दोषी करार दिए गए कार्यकर्ताओं में सीपीएम के ग्रामीण प्रभाग के दो सदस्य भी शामिल हैं.

'सच्चाई की जीत'

इस मामले में 2002 में सूरी की अदालत में 74 लोगों के ख़िलाफ मामला दर्ज हुआ था.

कई साल तक चली सुनवाई के दौरान सात आरोपियों की मौत हो गई. जिसके बाद जीवित बचे लोगों में 44 लोगों को दोषी पाया गया है.

त्रिणमूल कांग्रेस के ज़िलाध्यक्ष अनुव्रत मोंडल के अनुसार, ''न्यायालय ने 23 लोगों को बरी करते हुए, भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 149 और 302 के तहत दोषियों को सज़ा सुनाई.''

उन्होंने कहा, ''ये सच्चाई की जीत है. सीपीएम कार्यकर्ताओं ने हमारे 11 बेगुनाह समर्थकों को बेरहमी से मार दिया था. हमने इस दिन का इंतज़ार किया था कि उन्हें सज़ा मिलेगी.''

अपील

इस जनसंहार के चश्मदीद शेख़ रफ़ीक कहते हैं, ''उस दिन मेरी आंखों के सामने मेरे भाई की हत्या कर दी गई, लेकिन आज मैं संतुष्ट हूं.''

सीपीएम के नेताओं का कहना है कि वो इस फ़ैसले के खिलाफ ऊँची अदालत में अपील करेंगे.

पश्चिम बंगाल में 33 साल से सत्ता में मौजूद सीपीएम को पछाड़ने की कोशिश में जुटे विपक्षी दलों के लिए ये फैसला महत्वपूर्ण है.

त्रिणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए कहा, ''ये फ़ैसला दिखाता है कि मार्क्सवादी कितने क्रूर और निर्दयी हैं.''

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