पुत्र करेंगे पिता के शव की चीरफाड़

डा.महनतेश रामनवार
Image caption डा.महनतेश रामनवार का कहना है कि उनके पिता का उदाहरण औरों को भी शवदान के लिए प्रेरित करेगा.

मानव शरीर पर शोध को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक के बेलगाम मेडिकल कॉलेज के एक चिकित्सक अपने पिता के शव पर चीरफाड़ करने जा रहे हैं.

ये भारत में ऐसा पहला मामला होगा जहाँ पुत्र अपने पिता के मृत शरीर की शोध के लिए चीरफाड़ करेगा.

डॉक्टर महंतेश रामनवार ने बीबीसी से कहा कि ये एक मुश्किल काम है लेकिन उनके सामने कोई चारा नहीं है.

डॉक्टर रामनवार के स्वतंत्रता सेनानी पिता ने अपनी वसीयत में निर्देश दिए थे कि उनके शरीर का इस्तेमाल शोध को बढ़ावा देने के लिए किया जाए.

वसीयत में ये भी कहा गया था कि इसके लिए ज़रूरी चीरफाड़ उनके चिकित्सक पुत्र ही करें.

डॉक्टर रामनवार के पिता एक मशहूर आर्युवैदिक चिकित्सक थे और उनकी मृत्यु पिछले साल हुई थी.

महंतेश रामनवार ये ऑपरेशन पिता की मृत्यु की पहली बरसी पर 13 नवम्बर को करेंगे.

डॉक्टर रामनवार अंग्रेज़ चिकित्सक विलियम हार्वे को अपनी प्रेरणा मानते हैं जिन्होंने शोध को बढ़ावा देने के लिए अपनी बहन के शव का इस्तेमाल किया था.

शवदान

डा.रामनवार कहते है कि उन्हें उम्मीद है कि उनके पिता का ये त्याग दूसरों को प्रभावित कर सकेगा और लोग चिकित्सा क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए शवदान करेंगें.

चिकित्सा क्षेत्र में शोध के लिए जितने शवों की ज़रूरत है उसकी तुलना में शवदान बहुत ही कम होते हैं. भारत ने 1994 में एक कानून बनाकर 'ब्रेन डेड' लोगों से प्रतिरोपण को क़ानूनी घोषित कर दिया है.

अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में आम लोगों में जागरूकता लाने की ज़रुरत है. डॉ. रामनवार कहते है कि उनके परिवार ने उनके पिता के नाम पर एक ट्रस्ट की स्थापना की है जहाँ लोग शवदान कर सकते हैं.

उनका कहना है कि उनके परिवार के हर व्यक्ति ने वसीयत करके अपना शवदान करने के निर्दैश दे दिए हैं.

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