राजा पर प्रधानमंत्री चुप

ए राजा
Image caption डीएमके और सरकार फ़िलहाल राजा के बचाव कर रही हैं

विवादित संचार मंत्री ए राजा को मंत्रिमंडल से हटाने के सवाल पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यह कहकर चुप हो गए कि संसद सत्र में है इसलिए बाहर कुछ कहना ठीक नहीं होगा.

हालांकि उन्होंने कहा है कि ए राजा की पार्टी डीएमके अभी भी यूपीए गठबंधन की सदस्य है लेकिन उन्होंने एआईएडीएमके के समर्थन के प्रस्ताव को ख़ारिज नहीं किया है और कहा है कि इस पर अंतिम फ़ैसला कांग्रेस आलाकमान को लेना है.

मोबाइल कंपनियों को 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन मामले में भारी भरकम घोटाले का आरोप झेल रहे संचार मंत्री ए राजा को हटाने के लिए सरकार पर बड़ा दबाव है.

विपक्षी दलों ने संसद की कार्यवाही दो दिनों से ठप कर रखी है.

लेकिन जिस तरह से डीएमके ए राजा के पक्ष में खड़ी हुई है, प्रधानमंत्री के सामने यह असमंजस साफ़ दिखता है कि वे यूपीए के एक अहम घटक दल के मंत्री को किस तरह से हटाएँ.

माना जा रहा है कि इस पर अंतिम फ़ैसला अब सोमवार तक हो पाएगा.

दबाव

विपक्षी दलों ने सीएजी की उस रिपोर्ट के बाद सरकार पर अपना दबाव बढ़ाया है जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि मोबाइल कंपनियों को सस्ती दरों पर लाइसेंस देने से सरकार को 1.70 लाख करोड़ का नुक़सान हुआ.

ये रिपोर्ट अभी संसद में पेश नहीं हुई है इसलिए सरकार की ओर से इस पर कोई अधिकृत टिप्पणी नहीं की जा रही है.

लेकिन ए राजा को बढ़ते दबाव का ही परिणाम है कि 18 सांसदों वाली डीएमके पार्टी के नेता करुणानिधि को कहना पड़ा है कि राजा दोषी नहीं हैं और उन्होंने नियमानुसार ही 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया है.

ए राजा ने भी इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए कहा कि स्पेक्ट्रम के आवंटन में कोई घोटाला नहीं हुआ.

उधर विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने भी ए राजा के बचाव की कोशिश की है.

लेकिन तमिलनाडु में डीएमके की प्रतिद्वंद्वी पार्टी एआईएडीएमके की नेता जयललिता भाँप रही हैं कि यूपीए गठबंधन में उनकी ज़रुरत हो सकती है इसलिए उन्होंने अपने नौ सांसदों और कुछ समान विचार वाले सांसदों के साथ कांग्रेस को साथ देने का आश्वासन दे रही हैं.

वैसे तो जी20 शिखर सम्मेलन से लौटते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें जयललिता के प्रस्ताव के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसका फ़ैसला कांग्रेस आलाकमान को लेना है.

उन्होंने ए राजा से जुड़े सवालों पर यह कहकर किनारा कर लिया, "अभी संसद सत्र में है और यह मामला अदालत में भी है इसलिए इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा."

माना जा रहा है कि सोमवार तक सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश कर दी जाएगी. तब तक कांग्रेस आलाकमान और डीएमके के बीच वो बातचीत हो चुकी होगी जिससे ए राजा का हटना या रहना तय होगा.

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