दूरसंचार मंत्री ए राजा ने दिया इस्तीफ़ा

ए राजा
Image caption दूरसंचार मंत्री ए राजा ने इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को सौंप दिया है.

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. राजा ने रविवार देर रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया.

इस्तीफ़ा सौंपने के बाद राजा का कहना था कि उनके कार्यकाल में दूरसंचार मंत्रालय ने बेहतरीन काम किया है और लोगों के लिए कॉल की दरें बहुत कम हो गई हैं.

'मैं निर्दोष हूं'

उनका कहना था, ''मेरी नीयत बिल्कुल साफ़ है. मुझे मेरे नेता (एम करुणानिधि) ने इस्तीफे़ की सलाह दी थी ताकि संसद की कार्यवाही सुचारु रुप से चल सके और सरकार को कोई शर्मिंदगी न हो. ''

बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर खड़े संवाददाताओं को संबोधित करते हुए ए राजा ने कहा, '' मैने कोई ग़लती नहीं की है. इस्तीफ़ा देने का ये मतलब नहीं कि आरोपों को स्वीकार कर रहा हूं. मैं निर्दोष हूं. मैंने संसद में और संसद के बाहर लोगों से वादा किया था कि टेलीकॉम उद्योग में क्रांति आएगी और मैंने वो काम पूरी ईमानदारी से और नियमों का पालन करते हुए किया है.''

द्रमुक के प्रवक्ता टीकेएस इलानगोवन ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि द्रमुक नेता एम करुणानिधि ने यह फ़ैसला किया कि राजा इस्तीफ़ा दें ताकि संसद की कार्यवाही सुचारु रुप से चल सके.

राजा बनाम अंबेडकर

डीएमके प्रमुख एम करुणानिधी ने कहा है कि उनके सहयोगी ए राजा ने संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस्तीफ़ा दिया है.

उन्होंने कहा कि संसद की कार्रवाई रोकने और यूपीए के कामकाज को ठप्प करने के लिए संसद में बैठे कुछ लोगों ही काफ़ी हैं. लंबे समय से राजा के ख़िलाफ आरोप-प्रत्यारोप को दौर चल रहा था और संसद की कार्रवाई ठप्प हो रही थी.

करुणानिधी ने राजा की तुलना ईवी रामास्वामी, सीएन अन्नदुरै और बीआर अंबेडकर से करते हुए कहा कि इस्तीफ़ा देकर उन्होंने ज़िम्मेदारी, निष्पक्षता और साफ़गोई का परिचय दिया है.

'लोकतंत्र की जीत'

राजा के इस्तीफ़े को लोकतंत्र की जीत बताते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में बने रहने के लिए डीएमके के सामने हथियार डाल दिए थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने जावड़ेकर के हवाले से कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल शपथ-पत्र भी इस रणनीति की एक कड़ी है.

सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा है कि टेलीकॉम मंत्री ने लोकतांत्रिक मूल्यों का निर्वाह करते हुए इस्तीफ़ा दिया है. ऐसा करके उन्होंने खुद को नैतिकता की कसौटी पर कसा है.

उन्होंने कहा कि यूपीए ने एक बार फिर जवाबदेही और साफगोई की परंपरा को निभाया है.

जांच की मांग

उन्होंने कहा कि यूपीए और डीएमके का गठजोड़ बेहद मज़बूत है और राजा के इस्तीफ़े का इस साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

कांग्रेस का कहना है कि अब राजा के इस्तीफ़े का बाद उन्हें उम्मीद है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही आसानी से चलने देगा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि राजा का इस्तीफ़ा हो गया है लेकिन उनकी पार्टी पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग को जारी रखेगी.

राजा का इस्तीफ़ा फ़िलहाल स्वीकार नहीं हुआ है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री सोमवार को इस मुद्दे पर संसद को संबोधित करेंगे.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट में आज 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई भी है.

राजनीतिक बवाल

राजा को लेकर कई दिनों से राजनीतिक बवाल चल रहा था और विपक्षी दल संसद की कार्यवाही चलने नहीं दे रहे थे. ए राजा पर आरोप हैं कि उन्होंने टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन में नियमों का उल्लंघन किया और ऐसी कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित किए जो नियमों पर खरे नहीं उतर रहे थे.

राजा को लेकर विरोध कई महीनों से चल रहा था लेकिन हाल में कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के ख़िलाफ़ जिस तरह से कार्रवाई की उसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया.

माना जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बात के पक्ष में था कि राजा इस्तीफ़ा दें ताकि पारदर्शी और ईमानदार सरकार की छवि बरकरार रह सके.

ए राजा द्रमुक नेता एम करुणानिधि से मिलने के लिए चेन्नई भी गए थे और रविवार को दिन में उन्होंने संवाददाताओं से साफ़ कहा था कि उनके इस्तीफ़े का सवाल ही नहीं उठता है. हालांकि वो देर रात जब दिल्ली पहुंचे तब तक उनका इस्तीफ़ा तय हो चुका था.

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