टाटा का भ्रष्टाचार से सामना

 रतन टाटा, रमेश पोखरियाल और मार्गरेट अल्वा
Image caption उत्तराखंड सरकार ने रतन टाटा को स्मृति चिन्ह भेंट किया

भारत के अंतरराष्ट्रीय उद्योगपति रतन टाटा ने देश में भ्रष्टाचार को बहुत बड़ी समस्या बताते हुए भंडाफोड़ किया है कि उन्हें भी इसका कड़वा स्वाद चखना पड़ा था जब टाटा एयरलाइंस चलाने का उनका बड़ा सपना भ्रष्टाचार की वजह से टूट गया.

रतन टाटा ने ये बातें देहरादून में राज्य स्थापना दिवस व्याख्यान माला में कहीं. व्याख्यानमाला में आए स्थानीय उद्योगपतियों और कारोबारियों को अपनी मिसाल के हवाले से रतन टाटा ने संदेश भी दिया कि बिजनेस में नैतिकता के मूल्य का कोई विकल्प नहीं हो सकता.

रतन टाटा ने "21वीं सदी में भारत की चुनौतियां और अवसर" विषय पर अपने व्याख्यान में 'भ्रष्टाचार' को 'उभरते भारत' की सबसे बड़ी समस्या क़रार दिया जहाँ लोग फ़ायदा उठाने के लिए रिश्वत लेने और देने से नहीं हिचकते.

उन्होंने कहा कि इसके लिए उनसे 15 करोड़ रुपए मांगे गए थे लेकिन उन्होंने ये रिश्वत देने से साफ़ इनकार कर दिया था क्योंकि बक़ौल उनके टाटा समूह के अपने बिजनेस मूल्य हैं, भले ही टाटा समूह को इसका खामियाजा भुगतना पडा और टाटा कभी अपनी विमान सेवा नहीं शुरू कर पाया.

टाटा के मूल्य

रतन टाटा ने बताया कि घरेलु विमान सेवा में उतरने के लिए टाटा ने 10-12 साल पहले सिंगापुर एयरलाइंस के सहयोग से कार्ययोजना भी बना ली थी लेकिन इस प्रस्ताव को पास करने के लिए उस समय उनसे 15 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई.

Image caption टाटा ने मुख्यमंत्री के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की

हालाँकि अपने बयान की आंच को भांपते हुए रतन टाटा ने ये भी जोड़ दिया कि उम्मीद है कि उनके बयान की छानबीन नहीं की जाएगी.

उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्य है कि भारत की छवि एक ऐसे देश की बन गई है जहाँ लोग कोई काम करने और करवाने के लिए ग़लत तरीक़े से पैसे का लेन-देन करते हैं.

रतन टाटा ने अपने व्याख्यान में कहा कि एक तरफ आतंकवाद जैसी समस्या है तो दूसरी तरफ माओवाद जैसी आंतरिक मुश्किलें जिनका हल तब तक नहीं निकाला जा सकता जब तक आदिवासियों और किसानों की तकलीफें दूर नहीं की जाएंगी.

अपने रिटायरमेंट से जुडे एक सवाल के जवाब में रतन टाटा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपरिहार्य नहीं होता और आशा व्यक्त की कि उनका उत्तराधिकारी भी मूलभूत नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए टाटा समूह और देश के हित के लिए काम करेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके रिटायरमेंट की पूर्व घोषित योजना में कोई बदलाव नहीं होगा.

ग़ौरतलब है कि टाटा की लखटकिया कार नैनो ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है क्योंकि वो सबसे छोटी और सस्ती कार है जो भारत की सड़कों पर दौड़ रही है.

टाटा ने ब्रिटेन की ख्यातिप्राप्त कार कंपनी जगुआर को भी कुछ वर्ष पहले ख़रीद लिया था जिसके बाद टाटा का नाम दुनिया भर में मशहूर हो गया था.

भारत में टाटा उद्योग समूह अपने मूल्यों के लिए जाना जाता है और कल्याण क्षेत्र में भी टाटा का बड़ा योगदान है जिसमें अस्पताल और स्कूल सहित अनेक सेवाएँ मुहैया कराई जाती हैं.

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