दिल्ली में इमारत ढही, 65 की मौत

  • 16 नवंबर 2010
बचाव कार्य

राजधानी दिल्ली के पूर्वी इलाक़े के लक्ष्मी नगर में एक पाँच मंज़िला इमारत के ढहने से कम से कम 65 लोगों की मौत हो गई है और 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

शीला दीक्षित ने कहा जाँच होगी

आशंका जताई जा रही है कि सोमवार की शाम ढही इस इमारत के मलबे में अभी भी बहुत से लोग फँसे हुए हैं. रात भर बचाव का कार्य चलता रहा और मंगलवार की सुबह भी मलबा हटाकर लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है.

इमारत ढहने के बाद का मंज़र

घायलों को दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है जहाँ कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है.

अस्पतालों में डॉक्टरों की विशेष टीम को तैनात किया गया है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा है कि राहत कार्य में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. उन्होंने कहा, "हो सकता है कि इमारत का निर्माण अवैध हो सकता है."

पुलिस ने इस इमारत के मालिक के ख़िलाफ़ ग़ैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है. मालिक फ़रार बताया गया है.

दिल्ली सरकार ने घटना की न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए गए हैं.

निचली मंज़िल में पानी

तीस साल पुरानी यह इमारत यमुना नदी के किनारे स्थित है.

इस इमारत में दिहाड़ी मज़दूर और निम्म मध्यम वर्ग के लोग रहते थे. जिस समय घटना हुई ज़्यादातर लोग काम से घर लौटे थे.

Image caption हताहतों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे हैं

पुलिस के अनुसार इस पाँच मंज़िली इस इमारत के भूतल में मॉनसून के समय पानी भर गया था और इसे अब तक नहीं निकाला जा सका था.

अनुमान लगाया जा रहा है कि लगातार पानी भरे रहने की वजह से इमारत की नींव कमज़ोर हो गई होगी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाँच मंज़िलों के ऊपर एक और मंज़िल का निर्माण हो रहा था.

इमारत गिरने के बाद स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुट गए थे. पुलिस के अलावा अर्धसैनिक बलों को भी राहत कार्य में लगाया गया है.

स्थानीय लोग में इस घटना को लेकर ख़ासी नाराज़गी दिख रही है.

दो-दो लाख का मुआवज़ा

Image caption शीला दीक्षित सोमवार की रात भी घटनास्थल पर पहुँचीं थीं

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मंगलवार की सुबह एक बार फिर घटनास्थल का दौरा किया.

उन्होंने इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को दो-दो लाख का मुआवज़ा देने की घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि मृतक बच्चों के परिजनों को 50-50 हज़ार रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री ने कहा, "जो घायल हुए हैं उनका विभिन्न अस्पतालों में बिना शुल्क इलाज़ तो हो ही रहा है. इसके अलावा उन्हें पचास-पचास हज़ार का मुआवज़ा दिया जाएगा."

सोमवार की रात घटनास्थल का दौरा करने के बाद बीबीसी से हुई बातचीत में शीला दीक्षित ने कहा, "अभी तो स्पष्ट रुप से कुछ कहना मुश्किल है. हो सकता है अवैध निर्माण हो. लापरवाही भी हो सकती है. अभी इस पर किसी नतीज़े पर पहुँचना सही नहीं होगा."

स्वास्थ्यमंत्री किरण वालिया और वित्तमंत्री एके वालिया ने भी घटना स्थल का दौरा किया है और उन्होंने आश्वासन दिया है कि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी.

पूरे इलाक़े में जाँच

घटनास्थल पर पहुँचे दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंदर खन्ना ने इस हादसे पर शोक प्रकट करते हुए कहा है कि इस इलाक़े में जो अवैध निर्माण होते रहे हैं उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है.

उनका कहना है कि आबादी के दबाव में भी इमारतों में मंज़िलें बनती गई हैं.

उन्होंने पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा है कि यह भवन सुरक्षा विभाग की ज़िम्मेदारी होती है कि वह सर्वेक्षण करता रहे और जो इमारतें ख़तरनाक हो सकती हैं उन्हें सील करें.

उनका कहना था, "अब इस मामले की पूरी जाँच होगी तो पता चलेगा कि किसने क्या किया और क्या नहीं किया."

उपराज्यपाल ने बताया, "मैंने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च के महानिदेशक से चर्चा की है और उन्होंने इस बात की स्वीकृति दी है कि वे दिल्ली के म्युनिसिपल कार्पोरेशन के साथ मिलकर पूरे शहादरा के इलाक़े के भवनों की सुरक्षा को लेकर सर्वेक्षण करेंगे."

उन्होंने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग ने भी पहले चेतावनी दी थी कि यमुना के तट पर बसे होने के कारण शहादरा के इलाक़े के भवनों की बुनियाद वैसी मज़बूत नहीं है, जैसी कि दिल्ली के दूसरे इलाक़ों की है.

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