अफ़ीम की खेती, माओवादियों का समर्थन

अफ़ीम की खेती
Image caption 'अफ़ीम की खेती को माओवादी बढ़ावा दे रहे हैं'

पश्चिम बंगाल पुलिस की गिरफ़्त में कैद एक माओवादी नेता का कहना है कि माओवादी राज्य में अफ़ीम की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं.

आपराधिक जांच ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार अजित दास नामक इस माओवादी ने पूछताछ में यह जानकारी दी है.

अधिकारियों के अनुसार दास का कहना है कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और नादिया ज़िलों में माओवादी किसानों को अफ़ीम की खेती करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं.

पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख नपराजित मुखर्जी ने बीबीसी को बताया कि अजित दास को आठ नवंबर को गिरफ़्तार किया गया है. उस पर उत्तरी कोलकाता के हलिशहर में एक छोटे से दुकानदार गोपाल साहा की हत्या का आरोप है.

मुखर्जी का कहना था, ‘‘ पुलिस को यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि माओवादियों ने छोटे से दुकानदार से एक लाख की रकम क्यों मांगी थी. पूरी जांच के बाद पता चला कि गोपाल साहा ड्रग्स डीलर था जिसके बाद पुलिस ने जांच में इस एंगल से भी जानकारी जुटानी शुरु की.’’

पुलिस के अनुसार अजित दास ने माना है कि माओवादी नादिया और मुर्शिदाबाद में अफ़ीम की खेती करने वालों से रंगदारी वसूलते हैं.

मुखर्जी का कहना था, ‘‘ अफ़ीम की खेती करने वाले किसानों से छोटे गुंडे वसूली करते ही रहते हैं लेकिन अब माओवादियों के आने से छोटे गुंडों की नहीं चलती है और माओवादी एकमुश्त रंगदारी लेते हैं.’’

पिछले दस वर्षों में नादिया, मुर्शिदाबाद, बीरभूम ज़िलों में अफ़ीम की खेती में ज़बर्दस्त तेज़ी आई है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर इसके ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा है लेकिन सफलता कम ही मिल सकी है.

भारत में हेरोइन की मूलत आपूर्ति बर्मा से होती है लेकिन अफ़ीम की खेती के ज़रिए किसानों को किसी और अनाज के मुकाबले अधिक मुनाफ़ा हो रहा है.

पिछले साल राज्य पुलिस ने करीब 2000 एकड़ ज़मीन में अफ़ीम की फसल नष्ट कर दी थी.

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