बिहारः सिलेंडर बम फटने से आठ मरे

  • 21 नवंबर 2010
चुनाव के दौरान बिहार में नक्सल प्रभावित इलाक़ों में हिंसा की आशंका व्यक्त की गई है.(फ़ाइल फ़ोटो)

बिहार में औरंगाबाद ज़िले में रविवार सुबह एक सिलेंडर बम फटने से आठ लोग मारे गए हैं.

ये घटना ज़िले के देव पुलिस थाने के अंतर्गत पचोखर गाँव में घटी जब ग्रामीण लड़के उस बम से छेड़छाड़ कर बैठे जिसके बारे में एक दिन पहले पुलिस को पता चला था और पुलिस ने इसे बालू की बोरियों से ढ़ककर रखा था.

लड़के भूल से उस सिलेंडर बम के साथ छेड़छाड़ कर बैठे क्योंकि वहाँ कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं था.

इस मामले में देब और ढीबरा पुलिस थाने के दारोगाओं को निलंबित कर दिया गया है. इन पर जीवित बम को हिफाज़त से नहीं रखने का आरोप था.

सरकार ने हरेक मृतक के परिजन को एक एक लाख मुआवजा देने की घोषणा की है और मामले की जांच की बात कही है.

बम को तत्काल इसलिए निष्क्रिय नहीं किया गया था क्योंकि बम निरोधी दस्ता उपलब्ध नहीं था.

राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बीबीसी को बताया, "आसपास के लोगों को उस बम से छेड़छाड़ नहीं करने की हिदायत दे दी गई थी."

इसके विपरीत गाँववालों का कहना था कि लापरवाही के कारण ये हादसा हुआ क्योंकि ना तो समय पर इस बम को निष्क्रिय किया गया और न ही उसे पुलिस के पहरे में रखा गया.

और भी हादसे

ग़ौरतलब है कि शनिवार को बिहार विधानसभा के आख़िरी चरण के मतदान के दौरान ज़िले के इमामगंज इलाक़े में एक 'कैन' बम को निष्क्रिय करते समय हुई चूक से हुए विस्फोट में बम निरोधी दस्ते का ही एक जवान मारा गया था.

साथ ही वहाँ खड़े एक होम गार्ड जवान की भी मौत हो गई थी.

इससे पहले इसी इमामगंज क्षेत्र में बांके बाज़ार के पास मतदान के पाँचवें चरण के दौरान एक कैन बम को निष्क्रिय करते समय हुए बम विस्फोट में दो पुलिसकर्मी मारे गए थे.

इन तीनों घटनाओं के बाद से पुलिस के सुरक्षात्मक उपायों पर सवाल उठ रहे हैं. इन घटनाओं में कुल 11 लोगों की जान गई है और वो भी इसलिए क्योंकि इन बमों को पुलिस निष्क्रिय नहीं कर पाई.

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